
टीकमगढ़। प्रदीप खरे। गरीब तो पहले से ही गरीब होता है, उस पर उसके साथ ठगी या चूना लगाने जैसी घटनाएं भी होने लगें, तो इसे फिर क्या कहा जाए। दूबरे और दो अषाढ़ वाली कहावत को चरितार्थ करने में कोई और नहीं, बल्कि नगर पालिका में स्वच्छता सर्वेक्षण का कामकाज देखने वाले ही लगे हुए हैं। यह कर्मचारी स्वच्छता का सर्वें करने में भले ही कोताही बरत रहे हों, लेकिन घरों से पैसे निकालने में माहिर देखे जाने लगे हैं। शहर के गरीबों को आवास दिलाने के नाम पर की जा रही बसूली और गरीबों की जेबों को खाली करने के मामले ने सभी को चौंका दिया है। यहां बता दें कि इस संबन्ध में नगर पालिका अध्यक्ष और अधिकारी पहले भी कई बार कह चुके हैं कि लोगों के झांसे में न आएं, पेंशन या कोई अन्य कार्य के लिए कोई पैसा मांगता है, तो वह सीधे संपर्क करें, लेकिन इस अपील का भी लोगों पर असर पड़ता नजर नहीं आ रहा है। शासन की योजनाओं का लाभ लेने के लिए अभी भी लोग पैसा देने में संकोच नहीं कर रहे हैं। अंधा क्या चाहे, दो आंखे…शायद यही सोचकर कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के इस दौर में बिना दिए आवास मिलना मुश्किल है, और लोग पैसा देने से गुरेज नहीं करते। आज सुबह पार्षद एवं नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष अभिषेक खरे रानू ने एक स्वच्छता सर्वेक्षण कर्मचारी को गरीब वार्डवासी से पैसा बसूलने के मामले में पकड़ा और सारा मामला नगर पालिका सीएमओ ओमपाल सिंह भदौरिया के संज्ञान में लाया। उन्होंने भी यह मामला पुलिस के संज्ञान में लाते हुए कार्रवाई करने का आग्रह किया है। श्री भदौरिया ने कहा है कि सारे मामले को गंभीरता से लिया जाएगा, इस मामले में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। साक्ष्य और सबूत जुटाने के बाद ही सारे मामले पर कुछ स्पष्ट कहा जा सकेगा। फिलहाल स्वच्छता सर्वेक्षण कर्मचारी महेन्द्र सोनी को पकडक़र पुलिस के सुपुर्द किया जा रहा है।
वार्ड पार्षद रानू खरे ने किया खुलासा-
इस संबन्ध में नेता प्रतिपक्ष नगर पालिका टीकमगढ़ अभिषेक खरे रानू ने बताया कि जब उन्होंने वार्ड में भ्रमण के दौरान गरीब परिवारों से चर्चा की और योजनाओं के बारे में जानकारी ली, तो लोगों ने बताया कि वह आवास के फार्म किसी महेन्द्र सोनी एनजीओ कर्मचारी को दे चुके हैं। जिसने आवास दिलाने का भरोसा दिलाया है। इसके एवज में उसको लोगों ने दो-दो हजार रूपए की राशि भी दी है। पार्षद श्री खरे ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इन लोगों से उस कर्मचारी के बारे में जानकारी एवं मोबाइल नंबर आदि चाहा, जो उन्हें वार्डवासियों ने उपलब्ध कराया। इसके बाद उन्होंने सर्वेक्षण कर्मचारी महेन्द्र सोनी को मौके पर ही बुलाया और कर्मचारी से चर्चा की। जिस पर उसने राशि बसूलने की बात को स्वीकार करते हुए गलती मानी। श्री खरे ने बताया कि इस तरह के कई स्वच्छता सर्वेक्षण में लगे एनजीओ कर्मचारी नगर के कई इलाकों में गरीबों को ठगने और उन्हें चूना लगाने में सक्रिय बताए जा रहे हैं। आवास पाने के लिए गरीब परिवार के लोग कर्जा लेकर या फिर अपनी जमा पूंजी देकर इन कर्मचारियों को दे रहे हैं।
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दो-दो हजार रूपए लेने का आरोप-
भोपाल के किसी एनजीओ द्वारा नगर में स्वच्छता सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। इस एनजीओ के कर्मचारी वार्डों में गरीबों को आवास सहित अन्य सुविधाएं दिलाने के नाम पर सुविधा शुल्क बसूलने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं। वार्ड नंबर 21 पार्षद अभिषेक खरे रानू ने बताया कि उनके वार्ड में निवासरत नंदलाल चढ़ार एवं एक महिला लक्ष्मी कोरी सहित कुछ और लोगों से दो-दो हजार रूपए की राशि आवास के नाम पर बसूलने का मामला सामने आया है। इसके अलावा अन्य वार्डों से भी इस तरह की राशि बसूलने की संभावना है। श्री खरे ने यह सारा मामला सीएमओ ओमपाल सिंह भदौरिया के संज्ञान में लाते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है।
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किराना दुकान पर लगा रहा मजमा-
वार्ड नंबर 21 में एक किराना दुकान पर उस समय मजमा लग गया, जब पार्षद अभिषेक खरे रानू ने स्वच्छता सर्वेक्षण कर्मचारी महेन्द्र सोनी को बुलाकर मामले की सच्चाई उजागर की। यहां कर्मचारी से की गई पूंछतांछ और वार्डवासियों द्वारा की गई शिकायत के दौरान अच्छा खास मजमा लगा रहा। श्री खरे ने कहा कि आवास पात्र हितग्राही को मिले, ऐसा प्रयास रहेगा। बिना किसी पैसा दिए ही लोगों को सुविधाएं मिलें, इसके लिए वह हमेशा वार्डवासियों के साथ हैं। लोगों ने आवास के नाम पर ठगी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया है। अब देखना है कि आवास के नाम पर बसूली करने वालों के खिलाफ पुलिस प्रशासन एवं नगर प्रशासन किस तरह की कार्रवाई करती है। क्या गरीबों से लिया गया पैसा वापिस होगा।








