
पंचायतों में नहीं मिल रही मजदूरी, युवाओं के लिए भी नहीं रोजगार
हरपालपुर। वैसे तो बेरोजगारी संपूर्ण देश की समस्या है लेकिन इसका सबसे ज्यादा प्रभाव बुंदेलखंड अंचल में देखने को मिल रहा है। यही कारण है कि बुंदेलखंड के लोग प्रतिदिन बड़ी संख्या में महानगरों की रुख कर रहे हैं। बात करें हरपालपुर की तो, यहां के रेल्वे स्टेशन से हर रोज सैकड़ों परिवार दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं। मजदूर वर्ग को स्थानीय स्तर पर मजदूरी का काम न मिलना और युवाओं के लिए जिले में रोजगार के अवसर न होना इस पलायन का मुख्य कारण है।शनिवार को हरपालपुर रेल्वे स्टेशन पर पहुंचे मीडियाकर्मियों ने जब लोगों से बात की तो पता चला कि ग्राम पंचायतों में ज्यादातर कार्य मशीनों से कराए जा रहे हैं जिस कारण से लोगों को मजदूरी नहीं मिल रही, ऐसे में उनके सामने परिवार का भरण-पोषण करने की समस्या है और इसी कारण से वे अपने परिवारों को लेकर महानगरों की ओर जा रहे हैं। कई युवा भी स्टेशन पर मिले जिनका कहना था कि स्थानीय स्तर पर उन्हें किसी तरह का रोजगार नहीं मिल रहा है जबकि वे अच्छी खासी पढ़ाई करके बैठे हैं। उनके सामने भी कोई विकल्प नहीं है जिस कारण से अब वे बड़े शहरों में नौकरी की तलाश करने के लिए जा रहे हैं। ग्रामीण अंचलों का भ्रमण करने पर पता चला है कि ज्यादार गांवों की 80 फीसदी आबादी पलायन कर चुकी है। हालांकि पंचायत के कागजों में मनरेगा के तहत ग्रामीणों को काम मिल रहा है, जो कि संदेह के घेरे में है। हरपालपुर क्षेत्र के ग्राम सरसेड़ के ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत मजदूरी का काम तो मिल रहा है कि दिन भर की मजदूरी 200 रुपए मिलती है जो कि परिवार चलाने के लिए इस महंगाई के दौर में काफी कम है। बड़े स्तर पर पलायन होने का एक और कारण मौसम की मार भी बताया जा रहा है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों से हर वर्ष फसलों पर प्राकृतिक आपदा जैसे सूखा, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि पड़ जाने के कारण खेती-किसानी करने परिवारों की कमर भी अब टूट चुकी है और ये परिवार भी महानगरों की ओर रुख कर रहे हैं।









