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सरकारी रेस्ट हाउस में अंगद की तरह जमे आला अधिकारियों के पैर, सरकारी आवास पड़े खाली, अफसर भी ले रहे रेस्ट हाउस की तमाम सुविधाएं, सरकार को लगा रहे लाखों का चूना

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निवाड़ी। अफसरों को न तो बिजली बिल जमा करना हो और न ही कोई सामान बाजार से लाना हो। मग्गा, बाल्टी और तौलिया, साबुन से लेकर भोजनादि तक से फुर्सत पाना हो…एसी की ठंडी हवा और सेवा में चपरासी हो…और क्या चाहिए। इतना ही नहीं शासन से मिलने बाला हाउस रेंट भी बचाना हो…तो निवाड़ी चले आईए। यह सब इसलिए कहा है, क्यों की यहां यह सब सुविधाएं मौजूद हैं। ऐसे कई अफसर हैं, जो आवास बन जाने के बाद भी यहां रहने से बचते आ रहे हैं। वह यह सब सुविधाएं भोगते हुए तीर्थ स्थली ओरछा के रेस्ट हाऊस में डेरा लंबे समय से जमाए हुए हैं। जिनकी देखरेख में यह विश्राम गृह होते हैं, वह भी आला अधिकारियों से कहने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। सूत्र तो बताते हैं कि आला अधिकारियों को यहां डेरा डाले हुए दो साल से अधिक समय गुजर गया है। यह भी नहीं कहा जा सकता है कि अभी और वह कितने समय और यहां रहने वाले हैं। विश्राम गृह की सुविधाएं बाहर से आने वालों को यहां या तो मिल नहीं पाती हैं, या फिर वह पुराने कमरों में रहने को मजबूर हो जाते हैं। क्यों कि नए कमरों में तो साहब का डेरा जमा हुआ है। देखना है कि प्रशासनिक अधिकारी इस ओर कब तक ध्यान देते हैं। यहां यह जानना भी जरूरी है कि ओरछा तीर्थ स्थली के साथ ही पर्यटक स्थली के रूप में भी देश दुनिया में जानी जाती है, जहां भारतीय एवं विदेशी सैलानियों का आना बना रहता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक रेस्ट हाउस आरामगाह बनते जा रहे हैं। कई महीनों से अधिकारी यहां डेरा जमाए हुए हैं। बताया गया है कि इन दिनों सरकारी धन का दुरूपयोग और अफसरों की मनमानी कोई नई बात नहीं लगती। जनता से सरोकार रखने वाले आला अधिकारी ही जब नियमों को ताक पर रखने लगे और मनमानी पर आमादा हो जाएं, तो फिर कर्मचारियों से उम्मीद रखना बेमानी होगा। सरकारी आवासों के खाली पड़े होने और रेस्ट हाउसों में अफसरों के डेरा होने की चर्चाएं आम हो चली हैं। जिला मुख्यालयों पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक की सक्रियता ने बाहर से आने वालों की चिंता जहां बढ़ा दी है, वहीं सरकार की मंशा पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। देखा जा रहा है कि बुंदेलखंड की अधिकांश पर्यटक स्थली पर बनें विश्राम गृहों में जहां स्थानीय अधिकारी महीनों से डेरा जमाए हुए हैं, वहीं उनके आवास खाली पड़े हुए हैं। इसमें ओरछा सहित निवाड़ी आदि इलाकों में विश्राम गृहों की चर्चाएं आम हो चली हैं। निवाड़ी जिले के प्रशासनिक महकमे में पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी यहां ओरछा रेस्ट हाऊस में पिछले दो-तीन साल से डेरा डाले हुए हैं। पिछले लगभग ढाई से तीन वर्षों से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल ओरछा स्थित सरकारी रेस्ट हाउस (विश्राम गृह) में अवैध रूप से जमे हुए हैं। एक ओर जहां निवाड़ी में उनके लिए निर्धारित सरकारी आवास खाली पड़े धूल फांक रहे हैंए वहीं दूसरी ओर वे सरकारी सुविधाओं का मुफ्त उपभोग कर शासन को लाखों रुपये का चूना लगा रहे हैं। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय राजनीतिक दल तक सब कुछ जानते हुए भी मौन साधे हुए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, निवाड़ी जिले में तिगैला के पास हाईवे पर वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सर्वसुविधायुक्त सरकारी आवास बनाए गए हैं। वर्तमान में ये आवास रिक्त पड़े हैं, जहां बड़े-बड़े अधिकारियों के निवास के लिए ही हैं। लेकिन अधिकारियों ने इन सरकारी आवासों में रहने के बजाय ओरछा स्थित सरकारी रेस्ट हाउस को ही अपना अघोषित आशियाना बना लिया है। पिछले करीब दो-तीन वर्षों से वे यहीं से अप-डाउन कर रहे हैं और रेस्ट हाउस के कमरों पर उनका अघोषित एकाधिकार स्थापित हो चुका है। इस संबन्ध में अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बात नहीं हो सकी।
मकान भत्ते का खेल और दोहरी वित्तीय चपत
इस मामले का सबसे स्याह पहलू यह है कि एक साहब रेस्ट हाउस की तमाम मुफ्त सुविधाओं (बिजली, पानी, मेंटेनेंस और स्टाफ) का भरपूर लाभ तो ले ही रहे हैं, बल्कि सूत्रों का दावा है कि वे इसके साथ-साथ शासन से मकान किराया भत्ता भी आहरित कर रहे हैं। नियमत: यदि कोई अधिकारी सरकारी आवास या विश्राम गृह का उपयोग करता है, तो वह मकान भत्ते का हकदार नहीं होता। यह सीधे तौर पर पदीय गरिमा का दुरुपयोग और सरकारी खजाने में सेंधमारी का मामला है। रेस्ट हाउस के व्यावसायिक किराये और भत्ते को जो? दिया जाएए तो पिछले तीन सालों में सरकार को लाखों रुपयों के राजस्व की क्षति हो चुकी है। फिर गौरतलब बात तो यह है कि यहां निवाड़ी में आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इतना ही नहीं कुछ आवास तो आबंटित भी हो चुके हैं। इसके बाबजूद भी अधिकारी यहां रहने से परहेज करते नजर आते रहे हैं।
विशिष्ठ अतिथियों की अनदेखी-
्रओरछा भगवान रामराजा सरकार की नगरी और एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। यहां प्रदेश और देश भर से मंत्रियों, न्यायधीशों, वरिष्ठ नौकरशाहों और अन्य अति महत्वपूर्ण व्हीव्हीआईपी लोगों का नियमित रूप से आना-जाना लगा रहता है। प्रोटोकॉल के तहत इन अतिथियों को ओरछा रेस्ट हाउस में रुकवाने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन, रेस्ट हाउस के प्रमुख कमरों पर जिले के वरिष्ठ अधिकारियों का स्थायी कब्जा होने के कारण, अक्सर बाहर से आने वाले अति महत्वपूर्ण अतिथियों को विश्राम गृह में कमरे ही नहीं मिल पाते। कई बार ऐन वक्त पर कमरों की अनुपलब्धता के कारण जिला प्रशासन को भी वीआईपी अतिथियों के सामने असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।
प्रशासन और राजनीतिक दलों की रहस्यमयी चुप्पी
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल जिले के सिस्टम पर उठता है। एक जिम्मेदार आईएएस राज्य प्रशासनिक सेवा का अधिकारी खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते पजा आ रहे हैं। कहा जा रहा है कि इस मामले में निवाड़ी जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। स्थानीय राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और विपक्ष को भी इस बात की पूरी भनक है कि ओरछा रेस्ट हाउस को कतिपय अधिकारियों ने अपना स्थायी आवास बना लिया हैए बावजूद इसके किसी भी दल या नेता ने आज तक इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठाई है। ना ही इस मामले की कोई विभागीय जांच बिठाई गई है।
व्यवस्था पर ही उठते हैं सवाल…?
क्या आला अधिकारियों के लिए मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम मायने नहीं रखते। खाली पड़े सरकारी आवासों का क्या औचित्य है, जब अधिकारियों को रेस्ट हाउस में ही रहना है। कहा जा रहा है कि सरकारी खजाने को लग रहे लाखों के चूने और मकान भत्ते की अवैध वसूली की रिकवरी कौन करेगा। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या मध्य प्रदेश का उच्च प्रशासनिक अमला (मुख्य सचिव कार्यालय) या मुख्यमंत्री कार्यालय इस मामले का संज्ञान लेकर कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करेगा या फिर सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का… की तर्ज पर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
जल्दी ही आवासों में होंगे अधिकारी सिफ्ट-प्रभारी मंत्री
रेस्ट हाऊस में रहने वाले अधिकारी जल्दी ही सिफ्ट होंगे। यह कहना है निवाड़ी जिले के प्रभारी मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह का। श्री कुशवाह ने कहा है कि आवास लोकार्पण का कार्यक्रम फिलहाल पेंडिंग पड़ा है। जल्दी ही कार्यक्रम रखा जाएगा। इसके साथ ही अधिकारियों को नवनिर्मित आवासों में सिप्ट कराया जाएगा। इसके साथ ही अधिकारियों को भी आवासो ंमें ही रहने के लिए निर्देशित किया जाएगा।

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