
लवकुशनगर। तहसील परिसर लवकुशनगर में ग्राम सिलपतपूरा सहित लगभग पच्चीस गांवों के स्थानीय लोगों ने एवं भैरा उप सरपंच ने लवकुश नगर एसडीएम राकेश शुक्ला को एसबी ग्रेनाइट कंपनी के पक्ष में ज्ञापन सौंपा है।
स्थानीय लोगों ने ज्ञापन में लेख किया कि हम सभी लोग तहसील चंदला के निवासी हैं जो एस बी ग्रेनाइट कंपनी की खदान खसरा क्रमांक 28/1 पर बहुत वर्षों से कार्य कर रहे हैं जो कंपनी तीस वर्षों से संचालित है। ग्रामीणों का कहना है कि एस बी ग्रेनाइट कंपनी के बारे मे बिगत कुछ दिनों से कंपनी ने हम लोगों को रोजगार दिया है जिससे विगत तीस वर्षों से हम ग्रामीणों की रोजी रोटी चल रहीं है। हम क्षेत्रीय लोगों को एसबी ग्रेनाइट कंपनी से किसी प्रकार की कोई शिकवा शिकायत नहीं है। बता दे कि कंपनी के एरिया में किसी भी प्रकार की कोई भी अनहोनी दुर्घटना नहीं हुई एसबी ग्रेनाइट कंपनी की खदान कई वर्षों से हमारे क्षेत्र में काम कर रही है जो ग्राम की आबादी से लगभग 800 मीटर दूर है कंपनी के आस पास कोई पूजा स्थल मंदिर, शमशान तालाब या सार्वजनिक स्थान मौजूद नहीं है। एसबी ग्रेनाइट कंपनी के संचालन से आसपास के गांव एवं स्थानीय ग्रामीणों एवं निवासियों को कोई खतरा नहीं है। खदान प्रबंधक ने हमसे हर समय नियम के अनुसार काम लिया है। कंपनी द्वारा खसरा नंबर 28/1 के दक्षिणी किनारे पर सुखा जलाशय की सुविधा के लिए कार्य किया इस जलाशय के पानी से तालाब लबालब भरा हुआ है। खदान से निकले कचरे को कभी भी पास के किसी भी तालाब में या किसी के खेत में नहीं डाला जाता है। कचड़े को हमेशा खसरा 28/1 के दक्षणी छोर पर शासन द्वारा स्वीकृत स्थान पर डाला जाता है। गांव के कुएं एवं हैंडपंप सूखने का आरोप भी निराधार है कंपनी ने अपने खदान क्षेत्र में हैंडपंप स्थापित किया है जो वर्षों से निरंतर पीने लायक पानी दे रहा है। जिसे हम कर्मचारी एवं अन्य ग्रामवासी भी उपयोग कर रहे हैं। सिलपतपुरा स्थित शासकीय माध्यमिक शाला के बारे में कंपनी पर आरोप पूर्ण रूप से निराधार गलत है। इस शाला से बहुत दूरी पर कंपनी खदान संचालन कर रही है जिससे किसी भी प्रकार की अशांति या दिक्कत विद्यार्थियों को नहीं हो रही है। इस वर्ष एसबी ग्रेनाइट कंपनी द्वारा शासकीय माध्यमिक शाला के प्रांगण के पीछे चारों तरफ करीबन 400 पेड़ लगाकर अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाई है। ग्रामीणों ने एसडीएम से गुहार लगाई है कि आप लिखित वास्तविक स्थिति के आधार पर आप मामले का निराकरण करें। भ्रामक खबरों पर ध्यान न देकर वास्तविक स्थिति देखकर निराकरण करें। हम सभी ग्रामीण जन स्थानीय लोग चाहते हैं कि कंपनी का कार्य किसी भी प्रकार से बाधित न हो क्योंकि हमारी आजीविका का आधार यही है जिससे हमारी रोजी-रोटी एवं जीवन यापन चलता है।








