
बड़ामलहरा। सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि में आयोजित सात दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा का घटयात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। सुबह श्री दिगंबर जैन मंदिर बड़ामलहरा से सात किमी दूर द्रोणगिरि तक गाजेबाजे हाथी राजस्थानी बैंड के साथ निकाली घटयात्रा के दौरान जयकारों से राहें गुंजायमान हो गई। घटयात्रा में पँचकल्याणक महोसत्व के सौधर्म कमल दिव्या जैन सूरजपुरा हाथी पर सवार होकर चले साथ ही माता पिता सुषील सीमा जैन सागर ,कुबेर प्रमोद प्रिया जैन,सानंद इंद्र संदीप श्वेता फौजदार, महायज्ञ नायक मणिक चंद सविता जैन,यज्ञ नायक हेमचन्द क्रांति जैन,भरत चक्रवती प्रासु आयुषी पाटनी ,सहित सभी मुख्य पात्र एवं अष्टकुमारी बग्गी पर सवार होकर घटयात्रा में शामिल हुये। आचार्य विरागसागर महाराज ससंघ का घटयात्रा में मंगल सानिध्य रहा। घटयात्रा द्रोणगिरि प्रवेष के साथ ही आचार्य विन्रम सागर महाराज ससंघ ने आचार्य विरागसागर महराज की आगवानी की। घटयात्रा में कपिल मलैया अध्यक्ष द्रोणगिरि समिति,महेष देवडिय़ा अध्यक्ष सकल दिगम्बर जैन समाज बड़ामलहरा,सुनील घुवारा मंत्री,शील देवडिय़ा ट्रस्टी,राजेन्द्र जैन,भगचन्द्र जैन पीली दुकान,सुशील मोदी,श्रेयांस फौजदार,रवि बजाज,नितिन चौधरी,पंकज जैन,मनु देवडिय़ा,विमल जैन,महेश शास्त्री,शुभम जैन, संजीव जैन, विपिन जैन,रितिक शाह, संकल्प जैन ,संचय जैन सहित क्षेत्रीय जैन समाज मौजूद रही। ध्वजारोहण के साथ शुरू हुई मंगल क्रियाएं
श्री एक हजार आठ आदिनाथ पंचकल्याणक महोसत्व में सुनील घुवारा परिवार के दौरा ध्वजारोहण किया गया। इस मोके पर आचार्य श्री ने कहा कि सुख केवल मनुष्य भव में प्राप्त होता है जो नाश नहीं हो सकता है। हमें तीर्थंकर प्रभु की शरण प्राप्त करनी चाहिए। जिन धर्म जिनेंद्र देव की शरण में आने से हमें सुख, हित और आनंद मिलता है। तीर्थंकर प्रभु ने भी मनुष्य पर्याय को प्राप्त करके सिद्ध पद को प्राप्त किया है इसलिए जिन धर्म और जिन शासन हितकारी व देने वाले है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में पाषाण और धातु की प्रतिमा में जिनत्व की स्थापना की जाती है इसलिए सभी को अपनी शक्ति और सामथ्र्य अनुसार परिणामों को निर्मल बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचकल्याणक मनोरंजन के साधन नहीं है ,इससे हमें मन की स्थिरता को प्राप्त कर जिन धर्म और उसके नियम को समझना चाहिए।








