छतरपुर। श्री कृष्णा विश्वविद्यालय में मानवाधिकार दिवस पर विधि विभाग द्वारा व्याख्यान माला का आयोजन विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि ाजेश कुमार देवरिया प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय छतरपुर एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में विष्णु सिंह सोलंकी सीनियर सिविल जज, सीनियर सिविल इंजीनियर जिला छतरपुर, डॉक्टर वीरेंद्र चादर अधिकारी जिला विधिक प्राधिकरण छतरपुर, विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. अमित कुमार जैन एवं कुलसचिव डॉ. दिगंत द्विवेदी उपस्थित रहे। सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों ने मॉं सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया एवं दीपप्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का प्रारंभ किया। आगंतुक सभी अतिथितियों का विधि संकाय के संकायाध्यक्ष डॉ. दिनेश बाबू गौतम ने पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय मुख्य न्यायाधीश परिवार न्यायालय देवरिया जी ने मानव अधिकार दिवस की विस्तृत चर्चा की और अपने अनुभवों को सांझा करते हुए कहा कि दुनिया भर में हर एक व्यक्ति के जन्मसिद्ध अधिकारों की अहमियत को उजागर करने के लिए, हर वर्ष 10 दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। मानवाधिकार सभी के लिए समानता, स्वतंत्रता और गरिमा सुनिश्चित करते हैं। संयुक्त राष्ट्र इन अधिकारों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सुनवाई का अधिकार भी मानव अधिकार की श्रेणी में आता है तो हमें सुनवाई के अधिकार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।विशिष्ट अतिथि जिला विधिक प्राधिकरण के अधिकारी डॉक्टर विजय सिंह चादर साहब ने मानव अधिकार, मौलिक अधिकार राज्य के नीति निर्देशक तत्व एवं मौलिक कर्तव्य में दिए गए बातों को दृष्टिगत रखते हुए मानव अधिकार की विस्तृत चर्चा की।विशिष्ट अतिथि विष्णु सिंह सोलंकी सीनियर सिविल जज ने अपने वक्तव्य में कहा मानवाधिकार उन सभी देशों के लिए अनिवार्य हैं जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। ये अधिकार अभिव्यक्ति, धर्म और प्रेस की स्वतंत्रता जैसी मौलिक स्वतंत्रताओं को शामिल करते हैं । ये लोगों को जीवन, स्वतंत्रता, सुरक्षा और संरक्षा का अधिकार भी प्रदान करते हैं।विश्वविद्यालय के कुलगुरू डॉ. अमित कुमार जैन ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानवाधिकार संयुक्त राष्ट्र का मुख्य केंद्रबिंदु हैं, और इनके बिना विश्व शांति सुनिश्चित करना असंभव है। मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा एक ऐसा दस्तावेज़ है जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा के अधिकारों को स्पष्ट करता है। ये अधिकार जीवन के सभी पहलुओं में भेदभाव से मुक्ति सुनिश्चित करते हैं।कुलसचिव डॉ. दिगंत द्विवेदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज की दुनिया में मानवाधिकार अनिवार्य हैं। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, स्वतंत्रता और सुरक्षा का जन्मजात अधिकार है। ये अधिकार लोगों को दुव्र्यवहार एवं उत्पीडऩ से बचाते हैं।इस कार्यक्रम में विधि विभाग के समस्त प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विधि विभाग की सहा. प्राध्यापक मेंघाजलि तिवारी ने एवं आभार सहा. प्राध्यापक डॉ. पूनम चौरसिया ने व्यक्त किया।










