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भारतीय राजनीति के गुरु एवं बुंदेलखंड की शान हैं पंडित सत्यव्रत चतुर्वेदी: गणेश भाई कुण्डिया

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छतरपुर। भाईदूज की शुभ बेला पर मतँगेश्वर सेवा समिति एवं दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर के पंडित सुधीर शर्मा के साथ योग एवं आयुर्वेद के विशेषज्ञ, परिवर्तन एनजीओ के प्रतिनिधि तथा खजुराहो के प्रतिष्ठित व्यापारी गण एकत्र होकर भारतीय राजनीति के गुरु एवं बुंदेलखंड की शान कहे जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पंडित सत्यव्रत चतुर्वेदी के आवास पर पहुँचे। सभी ने उनके दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और निरंतर मार्गदर्शन की मंगलकामनाएँ करते हुए भाईदूज के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
इस अवसर पर श्री चतुर्वेदी ने सभी आगंतुकों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि उनका खजुराहो से गहरा आत्मीय और भावनात्मक संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि खजुराहो केवल विश्व धरोहर स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और अध्यात्म का जीवंत केंद्र है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि खजुराहो को स्वच्छ, सुंदर और संस्कारित शहर बनाने में हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
पंडित शर्मा ने बताया कि उनका चतुर्वेदी परिवार से वर्षों पुराना पारिवारिक संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि भाईदूज का यह पर्व उनके जीवन का एक भावनात्मक अध्याय है उनके कर्म गुरु पंडित विनोद गौतम कि बहिन होने नाते हर वर्ष श्रीमती चतुर्वेदी से टीका करवाने एवं आशीर्वाद लेने के लिए अवश्य पहुँचते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जो आज भी स्नेह, सम्मान और संस्कारों का प्रतीक बनी हुई है। गुजरात के हैंडी क्राफ्ट व्यापारी गणेश भाई कुण्डिया ने कहा श्री चतुर्वेदी भारतीय राजनीती के एक ऐसे ईमानदार एवं विद्वान् गुरु है जिनके कार्यों एवं व्यक्तित्व क़ी प्रशंसा भारतीय राजनीती कि सभी पार्टियों के नेता विशेष कर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी एवं अमित शाह जी ने भी करते है
कार्यक्रम के पश्चात सभी सदस्य छतरपुर के पूर्व विधायक पंडित आलोक चतुर्वेदी पज्जन के निवास पर भी पहुँचे। वहाँ भी भाईदूज के अवसर पर आत्मीय भेंट एवं शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हुआ साथ में सचिन पाठक, ग्रजेश पाठक एवं अमेरिका से आए योगी दिनेश पाठक उपस्थित रहे। इस पूरे आयोजन में आध्यात्मिकता, सामाजिकता और भारतीय पारिवारिक मूल्यों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। खजुराहो और छतरपुर के जनमानस के लिए यह दिन न केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रहा, बल्कि यह बुंदेलखंड की सांस्कृतिक एकता और पारस्परिक सम्मान का उज्ज्वल उदाहरण भी बना।

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