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इलाज के अभाव में 16 वर्षीय आदिवासी बेटी की मौत

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2 बजे डॉक्टर ने किया रिफर, 7 बजे आयी एंबुलेंस1

बक्स्वाहा। यदि समय पर एंबुलेंस मिल जाती तो शायद 16 वर्षीय आदिवासी बेटी का जीवन बच जाता। पेट फूलने तथा उल्टी-दस्त की बीमारी से पीडि़त किशोरी को बक्स्वाहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया गया। यहां दो घंटे तक उपचार के बाद भी जब सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने जिला अस्पताल दमोह के लिए रिफर कर दिया। गरीब आदिवासी की बेटी को जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस से संपर्क किया गया लेकिन एंबुलेंस 5 घंटे बाद आयी मगर उस समय बेटी ने साथ छोड़ दिया था। थाना क्षेत्र अंतर्गत सुनवाहा निवासी हरिदास आदिवासी की बेटी जानकी उल्टी दस्त से परेशान थी। उसका पेट भी फूल रहा था। परिजन किशोरी को 11 बजे अस्पताल लाए जहां उसे भर्ती कराया गया। शुरूआत जांच के बाद किशोरी को एक ड्रिप लगाई गई लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने उसे दमोह अस्पताल के लिए रिफर कर दिया। प्राथमिक कार्यवाही के बाद उन्होंने एंबुलेंस से संपर्क किया लेकिन 5 घंटे तक एंबुलेंस नहीं आयी। बालिका की हालत लगातार बिगड़ती गई। समय से इलाज न मिल पाने के कारण अंतत: उसने जिंदगी को अलविदा कह दिया। जानकी के माता-पिता का कहना है कि यदि एंबुलेंस मिल जाती तो शायद उनकी बेटी की जान बच सकती थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ डॉ. सत्यम असाटी ने बताया कि उल्टी-दस्त और पेट फूलने के कारण उसे भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उसकी स्थिति सामान्य दिखने लगी थी। अचानक तबियत बिगडऩे के कारण उसे रिफर कर दिया गया।इनका कहना-इस मामले में एसडीएम बड़ामलहरा और सीएमएचओ को जांच के लिए आदेशित किया है। जांच उपरांत अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।पार्थ जैसवाल, कलेक्टर

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