
मद्वितीया पर भगवान चित्रगुप्त की हुई पूजा
छतरपुर। भाई-बहिन के पवित्र रिश्ते को प्रगाढ़ करने वाले भाईदूज पर्व पर बहिनों ने अपने भाईयों का तिलक करते हुए लंबी उम्र की कामना की। वहीं भाई-दूज के पर्व को यमद्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। वहीं व्यापारियों द्वारा अपने प्रतिष्ठानों की पूजा की जाती है।पांच दिवसीय दीवाली महोत्सव के पांचवें दिन भाई-दूज का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। धनतेरस से शुरू हुए इस पर्व का भाईदूज के साथ समापन हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बहिन के तिलक करने से और कामना करने से भाई की उम्र में वृद्धि होती है। कथा के मुताबिक आज के दिन यमुना नदी में स्नान का बहुत महत्व होता है। यमुना मैया के भाई यमराज प्रसन्न होते हैं लेकिन यमुना नदी का जल न मिलने पर स्वच्छ और पवित्र जल से स्नान करने के बाद घर के बाहर दोज रखकर उनकी पूजा करने से भी यमराज प्रसन्न होते हैं। आज के दिन भाई अपनी बहिनों के यहां जाकर तिलक कराते हुए उनसे आशीर्वाद लेते हैं और यथाशक्ति उपहार भेंट करते हैं। त्यौहार को परंपरागत तरीके से लोगों ने मनाया, बहिनों ने भाईयों को आशीर्वाद दिया। कायस्थ समाज ने चित्रगुप्त मंदिर में भगवान चित्रगुप्त की पूजा की। यमराज के बहीखाता संभालने वाले भगवान चित्रगुप्त ही सबके जीवन का लेेखाजोखा रखते हैं। इसलिए व्यापारी आज के दिन अपने बहीखातों का पूजन करते हैं।









