Home डेली न्यूज़ महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में इस्तेमाल हो रही थी चोरी की बिजली

महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में इस्तेमाल हो रही थी चोरी की बिजली

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विद्युत विभाग की टीम ने बनाया विद्युत चोरी का प्रकरण

छतरपुर। अपने कारनामों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले छतरपुर के महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्विद्यालय से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल इस नामचीन विश्विद्यालय में चोरी की बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसकी सूचना मिलने के बाद शुक्रवार को विद्युत विभाग की टीम ने विश्विद्यालय के विरुद्ध विद्युत चोरी का प्रकरण बनाया है।प्राप्त जानकारी के मुताबिक विद्युत विभाग को सूचना मिली थी कि छतरपुर के महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्विद्यालय में चोरी की बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है। शुक्रवार को इसी सूचना की पुष्टि करने ईई अमर श्रीवास्तव, सहायक अभियंता सौरभ टिकरिया के संयुक्त निर्देश पर विद्युत विभाग की टीम महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्विद्यालय पहुंची। जांच करने पर शिकायत सत्य पाई गई जिसके बाद विद्युत विभाग की टीम ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर धारा 135 के तहत विद्युत चोरी का प्रकरण बनाकर कार्यवाही प्रस्तावित की है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी विद्युत विभाग द्वारा विश्वविद्यालय भवन के निर्माण के दौरान चोरी की बिजली का उपयोग होना पाया गया था जिस पर कार्यवाही करते हुए निर्माण एजेंसी के ठेकेदार से विद्युत विभाग द्वारा 50 हजार रूपए का जुर्माना वसूला जा चुका है।रजिस्ट्रार ने दी गलत जानकारीविश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार यशवंत सिंह पटेल से जब विद्युत चोरी के बारे में बात की गई तो उन्होंने सफेद झूठ बोलते हुए कहा कि कनेक्शन के पैसे जमा हो चुके हैं और कुछ ही दिन में ट्रांसफार्मर भी लग जाएगा। लेकिन जब उनसे वर्तमान में उपयोग की जा रही बिजली के बारे में और अस्थायी कनेक्शन पर मीटर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफतौर पर झूठ बोलते हुए कहा कि मीटर लगे हुए हैं जबकि मीडिया ने नवनिर्मित भवन आलेख और कर्मशिला पर मौके पर जाकर देखा तो वहां कोई भी मीटर नहीं था। विद्युत विभाग की टीम ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कार्यवाही को अंजाम दिया।विद्युत चोरी के लिए खंभे पर डाले तार समेटते मिले कर्मचारीविद्युत विभाग की टीम जैसे ही बिजली चोरी की शिकायत पर विश्वविद्यालय कैम्पस में पहुंची तो मौके पर विश्वविद्यालय के कर्मचारी खंभे से तार हटाने का काम कर रहे थे। विजिलेंस की टीम को देखकर कर्मचारी मौके से नदारद हो गए जिसके बाद विभाग की टीम ने वहां पर पड़ी विद्युत केबिल भी जब्त कर ली। प्रकरण बनाए जाने के बाद जब टीम रजिस्ट्रार यशवंत सिंह पटेल के पास हस्ताक्षर के लिए पहुंची तो उन्होंने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। वहीं विद्युत विभाग के अधिकारी अमर श्रीवास्तव ने बताया कि लगभग 40 किलो वॉट का लोड दोनों भवनों में पाया गया है एक-दो दिन में प्रकरण बनाकर रिकवरी के लिए विश्वविद्यालय भेज दिया जाएगा।

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