
खजुराहो। खजुराहो में चल रहे मध्यप्रदेश के राजकीय खेल मलखम्ब के प्रशिक्षण का जायजा लेने के लिए आज संपूर्ण सरकारी अमला चिल्ड्रन पार्क पहुंचा जिसमें राजनगर अनुविभागीय अधिकारी प्रखर सिंह, एसडीओपी डॉ सलिल शर्मा, बिजली विभाग के श्री गुप्ता एवं आनंद त्रिपाठी तथा नगर परिषद खजुराहो के अध्यक्ष अरुण कुमार उर्फ पप्पू अवस्थी के साथ पत्रकार देवेंद्र चतुर्वेदी ,अविनाश तिवारी ने बच्चों के खेल का अवलोकन किया उपस्थित सभी अधिकारियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया। ज्ञात हो कि जिला मलखम्ब एसोसिएशन द्वारा मध्यप्रदेश के राजकीय खेल मलखम्ब का प्रशिक्षण नगर के ही समाजसेवी इन्द्रजीत दीक्षित द्वारा नि:शुल्क दिया जा रहा है। जिला मलखम्ब एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप सेन व छतरपुर प्रशिक्षक सौरभ कुशवाहा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।मलखंब प्राचीन मार्शल आर्ट का एक रूप है, जिसका उपयोग पहलवानों और प्राचीन युग के योद्धाओं को ट्रेनिंग में सहायक के रूप में किया जाता था। मल का शाब्दिक अर्थ है कुश्ती और खंब का अर्थ है खंबा। दोनों शब्द मिलकर मलखंब बनते हैं, जिसका अर्थ है खंबे पर कुश्ती। तीन प्रकार के मलखंब ने प्रतियोगिताओं में लोकप्रियता हासिल की है। वे हैं पोल, मलखंब, हैंगिंग मलखंब और रोप मलखंब।मलखंब का सबसे पहला प्रत्यक्ष वर्णन 12वीं शताब्दी की शुरुआत में मानसोलस नामक पाठ में पढ़ा जा सकता है, जिसे चालुक्य राजा सोमेश्वर द्वारा लिखा गया था। ऐतिहासिक मराठा साम्राज्य की हस्तियां जैसे लक्ष्मीबाई, झांसी की रानी, तांतिया टोपे और नाना साहब ने मलखंब का अभ्यास किया था। इस प्रशिक्षण ने संतुलन, निपुणता और अनुशासित रहने में मदद की मलखंब ने पहली बार साल 1958 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय जिमनास्टिक चैंपियनशिप में राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 1962 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पहली बार राष्ट्रीय मलखंब चैंपियनशिप आयोजित की गई थी। मध्य प्रदेश सरकार ने 9 अप्रैल, 2013 को मलखम्ब को राज्य खेल घोषित किया था। मलखम्ब भारत में सबसे प्राचीन खेलों में से एक है।









