
400 से अधिक मुंह कैंसर के मरीजों को डॉ. श्वेता गर्ग ने किया डायग्नोज
छतरपुर। अप्रैल ओरल कैंसर जागरूकता माह है। जो ओरल कैंसर के ख़तरों और शीघ्र पता लगाने के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये समर्पित है। मुंह के कैंसर से हर दिन हर घंटे एक व्यक्ति की मौत होती है। अक्सर मुंह के कैंसर की शुरुआत में दर्द नहीं होता और इससे इसके होने का पता नहीं चलता है। इसकी खासियत है कि अगर आपको लगातार मुंह में छाले आना, मुंह या कान में दर्द, आवाज में खराश, लगातार गले में खराश, निगलने में परेशानी, गर्दन में बिना दर्द के सूजन होना। अगर इस प्रकार के अपके शरीर में लक्षण है तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं और तत्काल जांच कराए। अगर केंसर के लक्षण पाए जाते है तो घबराए नहीं बल्कि तत्काल चिकित्सक से इलाज कराते हुए दबा का सेवन करें। जिससे केंसर जैसी बीमारी से निजात मिल सकती है। बीमारी गंभीर है लेकिन उचित इलाज लेने पर इस बीमारी से निजात भी मिल सकती है।
जांच से केंसर के लक्षणों की होती है पुष्टी-
जिला चिकित्सालय में पदस्थ डॉ. श्वेता गर्ग बताती हैं कि मुंह के कैंसर की जांच जीवन बचाती है। मुंह के कैंसर के अंतिम चरण में पहुंच कर भी बच जाने के बाद ईवा ग्रैज़ेल ने जागरूकता बढ़ाने के लिये सिक्स स्टेप स्क्रीनिंग जांच विकसित की। जिसमें गर्दन, गला, जीभ, मुंह की सतह, होंठ और गाल और तालु को चेक किया जाता है।
यह मुंह के रोग बदल सकते है केंसर में
डॉ. श्वेता गर्ग का कहना है कि मुंह में किसी भी प्रकार की बीमारी हो वह केंसर में बदल सकती है जैसे लेउकोप्लैकिया, ओरल सब्म्यूकस फाइब्रोसिस, लाइकेन प्लानस, पुरानी दर्दनाक अल्सर जैसी मुंह की बीमारी से केंसर बन सकता है। इस प्रकार की मुंह में समस्या होने पर तत्काल अपने नजदीकी चिकित्सक और मुंह की बीमारी से संबंधित चिकित्सक को दिखांए और जांच जरूर कराए। जांच के दौरान अगर केंसर के लक्षण पाए जाते है तो घबराए नहीं तत्काल चिकित्सक से इलाज ले और चिकित्सक की सलाह के अनुसार दबा का सेवन करें।
मुंह के कैंसर के प्रकार
चिकित्सक का कहना है कि मुंह में कई प्रकार के केंसर हो सकते है। जैसे होंठ का कैंसर, मसूंड़ों का कैंसर, गाल का कैंसर, जीभ का कैंसर, मुंह के कैंसर के कारण धूम्रपान, शराब, तंबाकू का सेवन, परिवार में किसी को कैंसर होना बताया जा रहा है। अगर इस प्रकार के केंसर के लक्षण पाए जाते है तो चिकित्सक की सलाह तत्काल लें और सलाह के अनुसार इसके लक्षणों को नजरंदाज न करे। समय पर जांच कराये और इसका इलाज अधूरा न छोड़े क्योंकि केंसर भारत में मौत का दूसरा बड़ा कारण बना हुआ है।
मुंह केंसर के 400 मरीजों का हुआ डायग्नोज-
मुंह के कैंसर की जांच स्क्रैप साइटोलॉजी, एफएनएसी और बायोप्सी के द्वारा बहुत ही अनुभवी पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर के द्वारा की जाती है। जीभ में हुए केंसर से पीडि़त परवारी मोहल्ला छतरपुर की निवासी शारदा महिला लगभग 50 वर्ष 2021 में उनके जीभ में छाला हो गया था। 6 महीनों से फिर वो एक दिन किसी के सुझाव से डॉ. श्वेता गर्ग के यहां पहुंची। जहां उन्होंने जीभ के छाले की स्क्रीप साइटोलॉजी की जांच की और कैंसर की पुष्टि कर दी। उनकी ही रिर्पोट और उनकी समझाईश से मरीज़ के परिजन उनको भोपाल के कैंसर अस्पताल इलाज के लिये ले गये। इसी रिपोर्ट के आधार पर उनका इलाज हुआ और आज उनके इलाज हुए तीन वर्ष हो चुके है शारदा पूरी तरह से केंसर की बीमार से जीत चुकी है और स्वस्थ्य है। इस प्रकार से डॉ. श्वेता गर्ग मुंह के कैंसर के अब तक 400 केस डायग्नोज़ कर चुकी है।








