
छतरपुर। पिछले लगभग 15 दिनों से छतरपुर जिले के भीतर सहकारी संस्थाओं में चल रहे कथित घोटाले के समाचार सामने आ रहे हैं। कांग्रेस की ओर से जिला पंचायत अध्यक्ष के पति हरिओम अग्रिहोत्री की डिकोली सहकारी संस्था पर करोड़ों के घोटाले के आरोप लगाए गए। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि हरिओम अग्रिहोत्री ने संस्था के सहायक समिति प्रबंधक रहते हुए अपने परिवार के लोगों को केसीसी का लाभ दिलाया। इतना ही नहीं उनके कार्यकाल में किसान ऋण माफी योजना के तहत भी लगभग तीन करोड़ रूपए का घोटाला किया गया।
जब इन आरोपों की पड़ताल की गई तो बड़ामलहरा सहकारी बैंक के मैनेजर ने गबन के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बैंक मैनेजर प्रदीप दुबे ने कहा कि उनकी बैंक शाखा के अधीन आने वाली सहकारी समिति डिकोली में किसी भी तरह का ब्याज ऋण माफी के अंतर्गत गबन हुआ ही नहीं है। उन्होंने बताया कि जिस 2 करोड़ 97 लाख रूपए की राशि को किसानों की ब्याज ऋण माफी के नाम पर हड़पा हुआ बताया गया वह राशि किसी के द्वारा हड़पी नही गई थी जांच में केवल यह राशि अपात्र पाई गई थी वह राशि बैंक मुख्यालय को वापिस कर दी गई। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष के पति के द्वारा अपने चहेतों को भी नियम विरूद्ध कोई लाभ नहीं दिया गया। इस शिकायत की जांच में यह बात साबित हो चुकी है। मैं जांच समिति का सदस्य नहीं था विस्तृत जानकारी के लिए आप वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करे। बहरहाल यह मामला पूरे तरीके से राजनैतिक सडय़ंत्र नजर आ रहा है।
भाजपा में चल रहा अंतर्कलह
सहकारी मामलों के जानकार बताते हैं कि घोटालों के यह आरोप भाजपा के अंतर्कलह का परिणाम है। हरिओम अग्निहोत्री के राजनैतिक विरोधी एवं बड़ामलहरा के कुछ क्षेत्रीय नेताओं ने मिलकर इस साजिश को न केवल रचा है बल्कि एक पूर्व विधायक की मिलीभगत से कांग्रेस को मोहरा बनाकर ऐसे आरोप लगवाए जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इन आरोपों के माध्यम से जो शिकायतें कराई जा रही हैं उन शिकायतों की जांच में स्थिति स्पष्ट हो चुकी है कि यह बेबुनियाद आरोप थे। बहरहाल ये मामला आगे भी सुर्खियों में रह सकता है क्योंकि इस मामले में एक तरफ राजनीति सरगर्म है तो दूसरी तरफ सहकारी संस्थाओं से जुड़े अधिकारी भी लिप्त हैं।








