छतरपुर। रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए जिला अस्पताल में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत अस्पताल में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और प्रतिदिन औसतन 80 से 90 मरीजों को निशुल्क एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। कुत्ते, बिल्ली, चूहे या अन्य आवारा जानवरों के काटने पर तुरंत इलाज अनिवार्य है, क्योंकि रेबीज से मौत निश्चित हो सकती है।पर्याप्त स्टॉक और इंट्राडर्मल तकनीक से वैक्सीनेशनटीकाकरण केंद्र की इंचार्ज रितु त्रिवेदी ने बताया कि जिला अस्पताल में फिलहाल 4039 डोज का स्टॉक उपलब्ध है। नए प्रोटोकॉल के अनुसार इंट्राडर्मल रूट से वैक्सीनेशन किया जा रहा है, जिसमें मात्र 0.1 द्वद्य की खुराक त्वचा की ऊपरी परत में दी जाती है। यह कुल चार डोज में लगाई जाती है काटने के दिन, फिर तीसरे, सातवें और 28वें दिन। गंभीर मामलों में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन भी उपलब्ध कराई जाती है।सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से 15-20 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। इससे वायरस फैलने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके बाद तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचकर डॉक्टर से परामर्श लें। यदि किसी क्षेत्र में वैक्सीन की कमी हो तो जिला स्वास्थ्य अधिकारी को सूचित करें।नगरपालिका ने जारी किया टेंडरनगरपालिका सीएमओ माधुरी शर्मा ने बताया कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और हमलों को देखते हुए एबीसी सेंटर स्थापित करने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। मार्च तक टेंडर खुल जाएगा। इसके बाद केंद्र में कुत्तों की नसबंदी की जाएगी। साथ ही आश्रय योजना के तहत पागल या आक्रामक कुत्तों को पकड़कर वहां रखा जाएगा, जहां उनका इलाज और देखभाल होगी। इससे बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों को होने वाली हानि रोकी जा सकेगी।










