महाराजपुर। आर्य समाज महाराजपुर में स्वामी दयानंद सरस्वती का 202वां जन्मदिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के बड़ी संख्या में नागरिक, आर्य समाज के सदस्य, विद्यालय परिवार के शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम सुबह 10 बजे आर्य समाज प्रांगण से शुरू हुआ। सबसे पहले ब्रह्म यज्ञ संपन्न हुआ, जिसके बाद देव यज्ञ किया गया। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित रविंद्र कुमार शास्त्री रहे। यज्ञ के पश्चात एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें स्वामी दयानंद सरस्वती के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विभिन्न वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।आर्य समाज के प्रधान उमेश कुमार आर्य ने स्वामी दयानंद को आप्त पुरुष बताते हुए कहा कि उन्होंने समाज को नई दिशा प्रदान की। स्वामी दयानंद ने ब्रह्म (ईश्वर) और वेदों को अपना प्रमुख आधार बनाया। इसी कारण आर्य समाज के पहले और दूसरे नियम ईश्वर से संबंधित हैं, जबकि तीसरा नियम वेदों के बारे में है। वेद परमात्मा की वाणी हैं, जिसमें संसार का समस्त ज्ञान समाहित है।उन्होंने बताया कि स्वामी दयानंद ने अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश के पहले समुल्लास में ईश्वर के स्वरूप को स्पष्ट किया, क्योंकि वे जानते थे कि ईश्वर के विषय पर सबसे अधिक विवाद होता है। जब संसार वेदों को भूल रहा था, तब उन्होंने वेदों की ओर लौटो का नारा दिया। सन् 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना कर उन्होंने छुआछूत, भेदभाव और पाखंड को मिटाने का प्रयास किया। आर्य समाज के पुरोहित रविंद्र कुमार शास्त्री ने बताया कि स्वामी दयानंद ने समाज को जगाने के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना किया, कई बार विषपान सहा और हमलों का शिकार हुए, किंतु सत्य के मार्ग पर कभी नहीं डिगे।आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री जयनारायण आर्य ने स्वामी दयानंद के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन की प्रत्येक घटना प्रेरणादायी है। उनके अंदर अटूट ब्रह्मचर्य बल था। वे सत्य के पथ पर बिना भय के आगे बढ़ते रहे, पाखंडियों को वेद ज्ञान से परास्त किया और जगह-जगह शास्त्रार्थ किए। कुमारी आकांक्षा चौरसिया ने स्वामी दयानंद के संपूर्ण जीवन का संक्षिप्त वर्णन किया। उन्होंने स्वामी जी के कथन का उल्लेख किया कि जन्म से कोई ब्राह्मण नहीं होता, बल्कि उत्तम कर्म से ब्राह्मण होता है। इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिका मीनू सेन एवं छात्र-छात्राओं ने स्वामी दयानंद के जीवन से प्रेरित मधुर गीत गाकर सभी का मन मोह लिया।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से लखन लाल आर्य (उपप्रधान), केशवदास अतरया, राजाराम चौरसिया, प्यारेलाल चौरसिया, अशोक चौरसिया, झुनंनाई, हरिश्चंद्र चौरसिया, राजू चौरसिया, हर प्रसाद चौरसिया, सीताराम कुशवाहा (प्रधानाध्यापक), श्रीमती आकांक्षा चौरसिया, रोशनी चौरसिया, कुमारी मीनू सेन, रुचिता अरजरिया, संतोषी सेन, लीला सेन आदि उपस्थित रहे।










