छतरपुर। छतरपुर जिले के पठापुर रोड पर स्थित रामजानकी कुंड, जो कभी आस्था, सौंदर्य और सुरक्षा का प्रतीक बनने जा रहा था, आज लापरवाही और अव्यवस्था की भेंट चढ़कर हादसों को न्यौता देता नजर आ रहा है। जिले के पूर्व कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट कहलाने वाला यह कुंड अब अधूरे निर्माण के कारण लोगों के लिए खतरे का कारण बन चुका है।रामजानकी कुंड को छतरपुर जिले का पहला और एकमात्र सुंदर कुंड के रूप में विकसित किया जा रहा था। प्रारंभ में कई दानदाताओं ने बढ़-चढ़कर सहयोग की घोषणा की, लेकिन निर्माण कार्य शुरू होते ही दानदाताओं ने हाथ पीछे खींच लिए, जिसके चलते कुंड का कार्य बीच में ही ठप हो गया। वर्तमान में कुंड का ढांचा दिल के आकार में तो तैयार है, लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया।अधूरा कुंड अब खुले और गहरे गड्ढे का रूप ले चुका है। आए दिन आवारा पशु इसमें गिर रहे हैं, वहीं यह क्षेत्र रिहायशी होने के कारण आसपास के बच्चे मंदिर के समीप मैदान में खेलते रहते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।विडंबना यह है कि इसी स्थान पर पूर्व में एक मासूम बच्चे की खेलते समय डूबने से मौत हो चुकी है। पांडेय परिवार के इकलौते पुत्र की इस दुखद घटना के बाद ही यहां कुंड निर्माण का निर्णय लिया गया था, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। लेकिन बिना ठोस प्लानिंग और निगरानी के खोदा गया यह गड्ढा अब दोबारा मौत का कारण बन सकता है।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस गंभीर स्थिति पर जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और दानदाता सभी चुप्पी साधे हुए हैं। न तो निर्माण पूरा कराने की पहल हो रही है और न ही अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कुंड का निर्माण पूर्ण नहीं किया गया या गड्ढे को सुरक्षित नहीं किया गया, तो यह स्थान किसी बड़ी दुर्घटना का गवाह बन सकता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी और हादसे का इंतजार कर रहा है?










