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क्रेशर संचालकों ने खनिज विभाग के विरुद्ध खोला मोर्चा

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छतरपुर। जिले के क्रेशर संचालकों ने अपनी विभिन्न मांगों और विभाग की कथित तानाशाही के विरोध में खनिज विभाग पहुँचकर अजय मिश्रा को एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान क्रेशर संचालकों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों पर खुलेआम रिश्वत मांगने और नियम विरुद्ध तरीके से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।नौगांव जनपद अध्यक्ष हेमलता पाठक के पति और क्रेशर संचालक राकेश पाठक ने कहा कि क्रेशर उद्योग मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों सरकारों को भारी राजस्व देता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा सिंगल विंडो सिस्टम की है, ताकि उद्योगों को बढ़ावा मिले, लेकिन स्थानीय माइनिंग अधिकारी हर क्रेशर पर फीता लेकर पहुँच जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन अधिकारियों को सीमांकन की कोई ट्रेनिंग नहीं है, वे केवल पैसे वसूलने और शराब के लिए अवैध मांग करने क्रेशर पर आते हैं। पाठक ने मांग की कि इन नए अधिकारियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच होनी चाहिए कि उनके पास इतनी महंगी गाडिय़ां और सुख-सुविधाएं कहाँ से आ रही हैं। शिकायत में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि 15-20 साल पहले जिन खदानों का विधिवत सीमांकन तहसीलदार और माइनिंग टीम द्वारा किया गया था, उसे अब जानबूझकर विवादित बनाया जा रहा है। संचालकों का आरोप है कि अधिकारी अब किसान ऐप जैसे माध्यमों का हवाला देकर खदानों को गलत तरीके से नापते हैं और जब तक उन्हें रिश्वत नहीं दी जाती, तब तक वे गलत रिपोर्ट लिखने की धमकी देते हैं। राकेश पाठक ने स्पष्ट किया कि संचालक उसी सीमांकन पर खुदाई कर रहे हैं जो उन्हें सरकार द्वारा आवंटित किया गया था, लेकिन अधिकारी पैसे ऐंठने के लिए फर्जी नाप-जोख कर रहे हैं। क्रेशर संचालकों ने कलेक्टर और मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और माइनिंग अधिकारियों द्वारा की जा रही अनावश्यक प्रताडऩा को तत्काल रोका जाए।

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