छतरपुर। करीब एक माह पहले जिले के नौगांव से शुरू हुआ युवाओं का आक्रोश आज जिला मुख्यालय की सड़कों पर दिखाई दिया। पिछले 29 दिनों से नौगांव थाने के सामने शांतिपूर्ण धरना दे रहे युवाओं ने अब अपनी मांगों को शासन-प्रशासन तक पुरजोर तरीके से पहुँचाने के लिए 29 किलोमीटर की पैदल यात्रा की। कड़ाके की ठंड और लंबी दूरी तय कर छतरपुर पहुँचे इन युवाओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।पदयात्रा का नेतृत्व कर रहे दीपू शर्मा ने बताया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 हमें बोलने की आजादी देता है और अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। लेकिन पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि वाक स्वतंत्रता की आड़ में सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाई जा रही है। हमारी सांस्कृतिक धरोहर और माँ-बहन-बेटियों के प्रति अपमानजनक वक्तव्य दिए जा रहे हैं, जो समाज में नफरत फैला रहे हैं। दीपू शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इन नकारात्मक वक्तव्यों को रोकने के लिए कोई ठोस कानून नहीं बनाया गया, तो भावी पीढ़ी का अपनी संस्कृति और नैतिक मूल्यों से विश्वास उठ जाएगा।कलेक्ट्रेट के बाहर सुंदरकांड और ज्ञापनकलेक्ट्रेट पहुँचे प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के बाहर बैठकर सुंदरकांड का पाठ किया और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में मांग की गई है कि मध्य प्रदेश राज्य अथवा केंद्र स्तर पर माँ-बहन एवं बेटियों के विरुद्ध अपमानजनक वक्तव्य से संरक्षण अधिनियम और धार्मिक विषयों पर अपमानजनक वक्तव्यों से संरक्षण अधिनियम जैसे विशेष कानून अधिनियमित किए जाएँ। युवाओं का तर्क है कि जिस तरह मोबाइल और तकनीक के युग में नफरत तेजी से फैलती है, उसे रोकने के लिए सामान्य विधियां पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि कठोर दंडात्मक प्रावधानों वाले विशेष कानून की आवश्यकता है।इनका कहनानौगांव से पैदल यात्रा कर आए युवाओं ने कलेक्ट्रेट में अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन राष्ट्रपति और राज्यपाल महोदय के नाम संबोधित है, जिसे तहसील कार्यालय द्वारा स्वीकार किया गया है। पुलिस और प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस ज्ञापन को उचित माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों और उच्च स्तर तक पहुँचाया जाएगा।अरविंद सिंह दांगी, थाना प्रभारी, सिटी कोतवाली, छतरपुर










