छतरपुर। वर्ष 2024-25 में जिले के छात्रावासों की मरम्मत के लिए दो करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी। इस राशि से कई छात्रावासों में मरम्मत कार्य तो कराए गए, लेकिन सूत्रों के अनुसार उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) 30 प्रतिशत कमीशन लेकर जारी किए गए। जिन अधीक्षकों ने कमीशन नहीं दिया, उनके छात्रावासों की यूसी अब तक लंबित है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 54 छात्रावासों के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, परंतु निर्माण शाखा प्रभारी नरेन्द्र यादव ने अपने पसंदीदा छात्रावासों को राशि देने का प्रस्ताव जिला संयोजक के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया।लवकुशनगर से भी ऐसा ही मामला सामने आया है। अनुसूचित जाति उत्कृष्ट छात्रावास के अधीक्षक जेडी सोनकिया ने जब कमीशन देने से इनकार किया, तो शाखा प्रभारी नरेन्द्र यादव एवं उनके साथियों ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रच दिया। बताया गया कि चौकीदार कालीचरण अहिरवार (बालक छात्रावास कुर्राहा) को भड़का कर अधीक्षक के खिलाफ झूठी शिकायत कराई गई। 1 नवंबर को अधीक्षक शाम 6 बजे अपने घर की ओर आ रहे थे उनके साथ सुरेश नागर, रामचन्द्र रिछारिया भी मौजूद थे। कालीचरण की पत्नि के द्वारा अधीक्षक के साथ अभद्रता की गई जिसकी उन्होंने शिकायत तत्काल ही लवकुशनगर थाने पहुंचकर की लेकिन इस मामले में चौकीदार परिवार थाने पहुंचा, अपनी गलती मनाने के बाद मामले को शांत कराया। लेकिन अगले दिन उसी परिवार की ओर से अधीक्षक पर ही गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायती आवेदन दिया गया।जानकारी के अनुसार नरेन्द्र यादव पिछले 20 वर्षों से आदिमजाति विभाग के निर्माण कार्यों से जुड़े हैं और कई विवादों में घिरे रहने के बावजूद उन्हें उस शाखा से नहीं हटाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक बड़े अधिकारियों तक वसूली की रकम मनोज अहिरवार और नरेन्द्र यादव के माध्यम से पहुंचाई जाती है, जिसमें महाविद्यालयीन छात्रावास में पदस्थ राजाराम अहिरवार और उनका ड्राइवर दीपक अहिरवार भी सहयोगी के रूप में शामिल हैं।इनका कहना-अभी मुझे जहां तक मालूम है कि सभी को उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए। अब क्यों नहीं किए गए इसकी जानकारी लेता हूं। अभी जो 20 लाख रूपए की राशि आयी थी उसके लिए अभी छात्रावासों की सूची में संशोधन किया जा रहा है। मेरे द्वारा किसी से वसूली नहीं करायी जा रही है। ये सरासर झूठ हैं।मनोज अहिरवार, जिला संयोजक, आदिमजाति कल्याण विभाग, छतरपुर










