रावण दहन के लिए निर्धारित स्थान मेला ग्राउंड के आसपास कलेक्टर कार्यालय, जिला न्यायालय, जनपद पंचायत और नगर पालिका परिषद के कार्यालय होने के चलते सुरक्षा के मद्देनजर रावण के पुतले में विस्फोटक और ईंधन की मात्रा कम रखी गई थी, जिस कारण से पुतला जलाने में भारी परेशानी हुई। जब पुतले में आग लगाई गई तो पुतला पूरी तरह नहीं जल सका, सिर्फ उसके हाथ और पैर जले। जब पुतला पूरी तरह नहीं जल पाया, तो उसे जबरन नीचे गिराया गया। इस बीच कई लोग पुतले के अवशेष लेकर भागते नजर आए। कुछ लोग पुतले की आँखें लेकर भाग गए तो कुछ ने पुतले की मूँछें नोच डालीं।









