छतरपुर। आत्म आराधना के पावन पर्युषण पर्व के छठवें दिन आज 2 सितंबर को उत्तम संयम धर्म गरिमपूर्वक एवं धार्मिक प्रभावना के साथ मनाया जाएगा।दस दिवसीय पर्वराज पर्युषण नगर के सभी जैन मंदिरों में विभिन्न धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ उल्लासपूर्वक मनाया जारहा है।नगर के जैन मंदिर में पूज्य आर्यिका संघ द्वारा एवं अतिशय क्षेत्र डेरापहाड़ी जैन मंदिर में श्री उमेश जैन शास्त्री,सांगानेर द्वारा दश धर्मों पर मंगल प्रवचन दिए जा रहे हैं।
डा. सुमति प्रकाश जैन के अनुसार पर्यूषण पर्व पर धर्म के दस लक्षणों में से छठवाँ धर्म उत्तम संयम धर्म पूरे नियम – संयम के पालन के साथ मनाया जाएगा। संयम को जीवन का श्रृंगार माना गया है। विद्वानों के अनुसार जिसके जीवन में संयम नहीं, उसका जीवन बिना ब्रेक की गाड़ी जैसा है।
उत्तम संयम धर्म जैन धर्म के दशधर्म में प्रमुख स्थान रखता है। इसका अर्थ है इन्द्रियों और मन को वश में रखकर आत्मा को विषय-भोगों से मुक्त करना। बाह्य संयम आचरण व इन्द्रियों पर नियंत्रण है, जबकि आन्तरिक संयम मन व भावनाओं पर नियंत्रण है। इसका उद्देश्य आत्मशुद्धि व मोक्ष की प्राप्ति है। व्रतों का पालन, आहार-विहार में मर्यादा, ध्यान-समाधि और क्रोध, लोभ, मान, माया का त्याग इसका व्यवहारिक रूप है। इससे शांति, अनुशासन और आत्मबल बढ़ता हैं तथा जीव मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होता है।
प्रो. जैन ने बताया कि पर्यूषण पर्व के दौरान नगर में अल सुबह प्रभात फेरी निकाली जाती है, जिसमें समाज के नर नारी, युवाजन और बच्चे उल्लासपूर्वक सम्मिलित होते हैं।इसके बाद सुबह से ही सभी जैन मंदिरों में श्री जी का अभिषेक पूजन आदि धार्मिक क्रियाएं पूरे मनोयोग से प्रारंभ हो जाती हैं।व्रतों में जैन समाज के स्त्री ,पुरुष, युवा एवं कई बच्चे पूरे दिन में केवल एक बार शुद्ध – सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं,जिसे एकासन कहते हैं। कई श्रावक तो पूरे दिन बिना कुछ आहार लिए उपवास करते हैं। सायंकाल मंदिरों में श्री जी की आरती और रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा प्रतियोगिताएं होती हैं,जिनमें सभीजन बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं।










