छतरपुर। छतरपुर जिले के दैनिक श्रमिकों ने आदिम जाति कल्याण विभाग के तहत संचालित अनुसूचित जाति/जनजाति बालक-कन्या आश्रम और छात्रावासों में कम मजदूरी और कमीशन की मांग के खिलाफ मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन सौंपा। इस दौरान आवेदन देने आए दैनिक श्रमिकों द्वारा जमकर हंगाम किया गया। जनसुनवाई में आवेदन देने के बाद दैनिक श्रमिक आदिम जाति कल्याण विभाग कार्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों के सामने धरने पर बैठकर नारेबाजी की गई। कुछ देर यहां नारेबाजी करने के बाद दैनिक श्रमिक पुन: कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जहां कलेक्टर के वाहन के सामने बैठकर धरना दिया गया। बाद में डिप्टी कलेक्टर कौशल सिंह से समाधान का आश्वासन मिलने पर दैनिक श्रमिक शांत हुए।
दैनिक श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें कलेक्टर दर 404 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 12,120 रुपये मासिक वेतन के बजाय मात्र 5,000 रुपये दिए जा रहे हैं, और आदिम जाति कल्याण विभाग के एकाउंटेंट रामबाबू शुक्ला कमीशन की मांग कर रहे हैं। श्रमिकों ने बताया कि वे वर्षों से छात्रावासों में रिक्त पदों पर काम कर रहे हैं, जहां सुबह 6 से 11 बजे और शाम 4 से 8 बजे तक 8-10 घंटे काम करना पड़ता है। इनमें 50 छात्र-छात्राओं के लिए चाय, नाश्ता, भोजन तैयार करना, गेहूं-चावल की सफाई, सुखाना जैसे कार्य शामिल हैं। पहले उनकी मजदूरी 6,902 रुपये, फिर 7,130 रुपये और बाद में 8,400 रुपये मासिक थी, लेकिन मई 2025 से इसे घटाकर 5,000 रुपये कर दिया गया। कुछ श्रमिकों को 280 रुपये प्रतिदिन, तो कुछ को 166 रुपये की दर से भुगतान किया गया, जिसे वे शोषण मानते हैं। श्रमिकों ने एकाउंटेंट रामबाबू शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि शुक्ला कमीशन की मांग करते हैं और न देने पर वेतन रोकने या अनियमित भुगतान की धमकी देते हैं। इससे परिवार का भरण-पोषण असंभव हो गया है। श्रमिकों ने कलेक्टर से मांग की कि उन्हें कलेक्टर दर 404 रुपये प्रतिदिन यानी कि 12,120 रुपये मासिक के हिसाब से भुगतान और बकाया अंतर की राशि दिलाई जाए। साथ ही, कमीशन और धमकी के मामले की जांच की जाए।









