
राज्यसभा सांसद एवं आदिवासी समाज से आने वाले सुम्मेर सिंह सोलंकी इस सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने अपनी भाषा में कहा कि आमो आखा हिंदू छे अर्थात हम सब हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि वह बहुत सौभाग्यशाली है जो उन्हें बागेश्वर धाम आकर ऐसे कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अत्यंत सरल और सीधा समाज है। वह प्रकृति का पुजारी है। हमारा समाज जीवन भर धर्म को माथे पर लिखे रहता है और यह अमिट होता है। अपने समाज के लोगों से कहा कि वह सनातन धर्म के लिए अपनी एकझुकता दिखाएं ताकि कोई धर्म परिवर्तन के लिए आंख ना उठा सके। सांसद श्री सिंह ने कहा कि महाराज श्री ने समाज को आर्थिक और सामाजिक दिशा में उन्नति करने का भी संकल्प दिलाया है। धार्मिक स्थल पर लिया गया संकल्प स्थाई रहता है।यात्राओं के बाद भी शिक्षा ली और अब समाज को कर रहीं शिक्षिततेलंगाना से आई निर्मला ने बताया कि उनके परिवार ने उन पर विवाह के लिए बहुत दबाव डाला। कई तरह से उसे प्रताडऩा दी लेकिन उसकी इच्छा शिक्षा ग्रहण करने की थी ताकि वह अपने समाज को शिक्षित कर सके। प्रताडऩा के बाद भी उसने हार नहीं मानी और कड़ी मेहनत कर शिक्षक बनी। आज वह हिंदू धर्म, सनातन धर्म के लिए काम करने के साथ-साथ अपने समाज को शिक्षित कर रही है। निर्मला का मानना है कि हिंदू धर्म के अलावा अन्य किसी धर्म में महिलाओं को सम्मान नहीं मिलता।धर्म परिवर्तन के साथ जमीनों पर लगी है निगाहेंमंडला से आई उषा कुशराम ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन के साथ-साथ आदिवासी समाज की जमीनों पर लोगों की नजर रहती है ताकि धर्म परिवर्तन के साथ ही उनकी जमीनों पर भी कब्जा किया जा सके। इंदौर की गौड़ परिवार की महिला ने कहा कि आदिवासियों को जंगल से बेदखल करने की साजिश की जा रही है। समाज के लोगों को शराब पिलाने की आदत जानबूझकर डाली जाती है ताकि वह ज्यादा से ज्यादा समय तक नशे में रहे और समाज के लिए कोई कार्य न कर सके। उन्होंने कहा कि हमें अपने महानायकों के जीवन से प्रेरणा लेकर उनके उद्देश्यों के लिए कार्य करना चाहिए। झारखंड से आई बहमनी सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में मिशनरी के स्कूल पढ़ाई को आधार बनाकर भोले भाले आदिवासी समाज का धर्म परिवर्तन कराते हैं।महाराज श्री ने दिलाए तीन संकल्पबागेश्वर महाराज ने आदिवासी समाज के लोगों को तीन संकल्प दिलाए। उन्होंने लोगों से कहा कि वह गांव या आसपास के गांव में स्थित मंदिर में शनिवार या मंगलवार को अवश्य जाएं ताकि आपस में एकता बनी रहे और सनातन विरोधी गतिविधियों की जानकारी मिलती रहे। उन्होंने दूसरा संकल्प दिलाया कि बागेश्वर धाम हनुमान चालीसा मंडल का गठन करें जिसके माध्यम से मंगल शनिवार हनुमान चालीसा का पाठ हो सके। पाठ होने से लोगों के विचारों में परिवर्तन आएगा और वह धर्म विरोधियों के खिलाफ एकजुट होंगे।








