
उजाले का पर्व दीपावली आज
छतरपुर। दुनिया में शायद ही कोई ही ऐसा व्यक्ति होगा जो मायामोह से परे हो और उसे धन की चाह न हो। दीपावली धन की देवी लक्ष्मी का त्यौहार है। साल भर में दीपावली का पर्व आते ही लोग घरों की सफाई कर लक्ष्मी मैया की कृपा प्राप्त करने के लिए आतुर हो जाते हैं। गुरूवार को उजाले का पर्व दीवाली है जिसे धूमधाम से मनाने की तैयार हो गई है।जब भी दीप जलाया जाता है तो दीपक से प्रार्थना की जाती है कि हमें उजाले की ओर ले चलो। जीवन के अंधकार को पार कर उजाले की ओर जाने का पर्व ही दीपावली है। लोगों ने अपने घरों को आधुनिक रोशनी से सजाया है। दशहरा से ही दीवाली पर्व मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लोग घर के कोने-कोने की सफाई करते हैं ताकि लक्ष्मी जी रूष्ठ न हों और उन पर कृपा बरसाएं। मायामोह से परे सिर्फ संत होते हैं बाकि लक्ष्मी की चाह वाले लोग हर हाल में लक्ष्मी जी की कृपा पाते हैं। पिछले कुछ वर्षों से मिट्टी के दीपक जलाने का चलन बढ़ गया है। इससे प्रजापति समाज का आर्थिक रूप से सहयोग हो जाता है। समाज के तानाबाना को ध्यान में रखकर हर समाज का साथ देना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आह्वान किया था कि लोकल फॉर वोकल। स्थानीय लोगों की मदद उनके द्वारा बनाई गई सामग्री खरीदकर की जा सकती है। लोगों में इसका प्रभाव भी देखने को मिल रहा है। समूचे बाजार में दीवाली पर्व को मनाने से जुड़ी सामग्री की भरमार देखने को मिल रही है। मऊदरवाजा के पास इलेक्ट्रिकल की दुकान संचालित करने वाले ब्रजेश अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने देशी झालरों को बेचने का प्रयास किया है। विभिन्न आधुनिक सजावट के सामान से लैस दुकान में दिन भर भीड़ देखने को मिली। न सिर्फ ब्रजेश अग्रवाल बल्कि शहर की अन्य दुकानों पर भी जमकर खरीददारी हुई। वहीं पुलिस द्वारा सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं।









