
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस आज
छतरपुर। 10 अक्टूबर को विश्व के 200 से अधिक देशों में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से अब यह भारत में भी मनाया जाने लगा है। नशाखोरी के कारण मानसिक रोगियों की तादाद बढ़ती जा रही है। किशोरावस्था से लेकर युवावस्था के बीच के लोग मानसिक रोग का शिकार होकर आत्महत्या करने में लगे हैं। आंकड़े बताते हैं कि विश्व में हर पल एक मानसिक रोगी मौत को गले लगा रहा है।मानसिक रोगियों की पिछले 34 वर्षों से बिना किसी मदद के देखभाल करने वाले डॉ. संजय कुमार शर्मा बताते हैं कि मनोरोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट लोगों की आंखें खोल रही है। 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लोग हर पल मौत के आगोश में समा रहे हैं। 2019 में मनोरोगियों के मौत का अनुपात 40 सेकेण्ड में एक व्यक्ति था लेकिन पिछले 5 वर्षों में आंकड़े इतने बढ़े कि हर एक सेकेण्ड में मानसिक रोगी की मृत्यु हो रही है। डॉ. शर्मा के मुताबिक नशीले पदार्थों का सेवन करने से मानसिक बीमारियां पनप रही हैं। आज के दौर की जीवनशैली प्रतिस्पर्धा, जलन, द्वेषभावना भी मानसिक रोग उत्पन्न कर रही है।मोबाइल और सोशल मीडिया से हो रहे मानसिक रोगी तैयारसोशल मीडिया के संपर्क में आने वाले नौजवान डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। माता-पिता एवं अभिभावकों की महत्वाकांक्षा भी कहीं न कहीं मानसिक रोगी बनाती है। मानसिक रोगियों के सेवक डॉ. संजय कुमार शर्मा का मानना है कि मोबाइल का अत्यधिक उपयोग लोगों को बीमार बना रहा है। उनके मुताबिक मोबाइल की लत दिमाग में घर कर बैठती है। मोबाइल न मिले तो बच्चों से लेकर युवाओं में चिड़चिड़ापन देखने को मिलता है। पर्याप्त कारगर उपचार न होने के कारण इस बीमारी पर नियंत्रण नहीं लग रहा।









