
लुप्त होने की कगार पर पहुंचा व्यापार, कारीगरों ने बंद किया काम
छतरपुर। आधुनिकता के इस दौर में लोग आकर्षक प्लास्टिक से बने बर्तनों को अपने जीवन में शामिल कर रहे हैं, जिसके चलते बाजारों से पीतल और तांबे के बर्तन विलुप्त होते जा रहे हैं। जबकि तांबे के बर्तनों को स्वास्थ्य के लिहाज से लाभदायक माना जाता रहा है, बावजूद इसके आज के दौर में लोग इन्हें नजरअंदाज कर खुद के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। एक समय पर छतरपुर की शान कही जाने वाली ताम्र शिल्प कला की धरोहर अब लुप्त होने की कगार पर है। बाजार में पीतल-तांबे बर्तनों की मांग कम होने और सरकार की बेरुखी के चलते कारीगरों ने बर्तन बनाने का काम लगभग बंद कर दिया है।उल्लेखनीय है कि कुछ दशक पहले तक देश के विभिन्न राज्यों के ताम्र शिल्पी छतरपुर आकर बर्तन बनाने का काम करते थे लेकिन आज इन कारीगरों को इस व्यापार से आजीविका चलाने में भारी कठिनाई हो रही है। छतरपुर में कई ऐसे निपुण ताम्र शिल्पी रहे हैं जिनके द्वारा बनाए गए बर्तनों की मांग न केवल बुंदेलखंड बल्कि पूरे देश में हुआ करती थी लेकिन आधुनिकता की चकाचौंध ने न केवल इन ताम्र शिल्पियों को बेरोजगार कर दिया है बल्कि इस व्यापार को भी लुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया है। तांबे और पीतल के व्यापार से जुड़े लोगों की मानें तो छतरपुर के लगभग 70 से 80 फीसदी कारीगरों ने यह व्यापार बंद कर दिया है। तांबा-पीतल के बर्तन बनाए जाने के लिए मशहूर छतरपुर के तमराई मोहल्ले में जहां खासी रौनक रहती थी, वहां की गलियां आज सूनी पड़ी हैं। यहां रहने वाले दर्जनों परिवारों की आजीविका का प्रमुख स्रोत तांबे-पीतल के बर्तन बनाने का कार्य होता था लेकिन सरकार की बेरुखी और आधुनिकता का चोला पहने लोगों की मानसिकता ने उन्हें बेरोजगार कर दिया है।तांबे और पीतल के बर्तनों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए लाभकारीभारत के चंडीगढ़ शहर में किए गए एक वैज्ञानिक शोध के अनुसार तांबे के पात्रों का इस्तेमाल करने से शरीर में कॉपर की कमी पूरी होती है और तांबे के बर्तन में रखा गया पानी सबसे शुद्ध होता है, जिसका सेवन करने से डायरिया, पीलिया, डिसेंट्री, पेट दर्द, गैस, एसिडिटी, थायराइड जैसी बीमारी नहीं होती। तांबे में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होता है, जिस कारण से शरीर में दर्द, ऐंठन और सूजन आने की समस्या नहीं होती। ऑर्थराइटिस की समस्या से निपटने के लिए भी तांबे के बर्तन में रखा पानी अत्यधिक फायदेमंद होता है। तांबे में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट, कैंसर की बीमारी से लड़ने की क्षमता में वृद्धि करते हैं। इसी तरह पीतल के पात्रों के इस्तेमाल से भी शरीर को कई तरह के लाभ होते हैं।









