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घर, विद्यालय और विश्वविद्यालय बोली के सबसे बड़े दुश्मन – प्रो. मणि मोहन

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राजनगर महाविद्यालय में हिंदी बुंदेली अंतर्संवाद संपन्न, स्त्री रचनाकारों ने पढ़ी कविताएं

छतरपुर। लोकसाहित्य उत्सव अंतर्गत हिंदी बुंदेली अंतर्संवाद का कार्यक्रम सोमवार को शासकीय राजनगर कॉलेज में सोल्लास संपन्न हुआ। संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता भाषाविद जीवन ज्योति पटेरिया ने की। प्रो. मणि मोहन मेहता और दिल्ली विश्व विद्यालय के प्राध्यापक प्रो. संजीव कौशल ने मुख्य वक्तव्य दिया। विषय प्रवेश प्रो. बहादुर सिंह परमार ने कराया। ख्यातिलब्ध कथाकार मनीष वैद्य ने फैसिलिटेट किया । यह आयोजन मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन और मध्य प्रदेश गांधी स्मारक निधि द्वारा संयुक्त रूप से किया गया है। प्रो मणि मोहन मेहता जी ने बच्चों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि घर विधालय और विश्वविद्यालय हमारी बोली के सबसे बड़े दुश्मन है अपने मार्गदर्शन में हिंदी बुंदेली का प्रयोग करते हुए बच्चों को अपने घरों में बुंदेली का प्रयोग करने की सलाह दी । तभी हमारी बोलियां बच सकेंगी ।दिल्ली विश्वविद्यालय से आए प्रोफेसर संजीव कौशल ने अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि भाषा मनुष्यों का जन्मजात गुण है। यह भाषा ही है जिससे मनुष्य प्राणिजगत में इतनी तरक्की कर सका है। भाषा के बनने में सामाजिक सहमति की एक बड़ी भूमिका होती है जिसके आधार पर शब्दों के अर्थ तय किए जाते हैं। किसी क्षेत्र विशेष से उपजी भाषा उसे क्षेत्र के हज़ारों साल से संचित अनुभवों को व्यक्त करने की कुंजी है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि हर भाषा को उसके परिवेश में पल्लवित किया जाए। आज जबकि भाषा और बोलियां का आपस में एक संघर्ष दिखाई देता है जहां भाषण बोलियों पर एक तरह का आधिपत्य जमाती जा रही हैं हमें बोलिया को उनकी गरिमा वापस देनी है और उस झिझक को भी मिटाना है जिससे कुछ लोग बोलियों के इस्तेमाल में असहज महसूस करते हैं। हमें बोलियों को ऐसा माहौल देना है जो एक मां अपने बच्चों को भाषा सिखाते हुए प्रदान करती है।स्त्री रचनाकारों का काव्यपाठहिंदी बुंदेली अंतर्संवाद के दूसरे सत्र में स्त्री रचनाकारों का काव्यपाठ किया। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. मालिनी गौतम ने किया। रचनापाठ की शुरुआत इश्क इतवार नही की कवि निदा रहमान ने किया। इसके बाद स्त्री के सपनों धंसा तीर की कवियत्री शिल्पी जैन ने दुख पर अपनी चर्चित कविताएं पढ़ी। इसके बाद समकालीन कविता की चर्चित कवियित्री ग्वालियर से आई नेहा नरूका ने अपनी स्त्री विषयक कविताओं से छात्राओं और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पेशे से चिकत्सक झांसी से आई कवि कथाकार नेहा अग्रवाल ने किशोरियों के यौन शोषण पर बहुत ही मार्मिक रचना पढ़ी। रचना पाठ की अध्यक्षता कर रही संतरामपुर गुजरात से आई अंग्रेजी की प्रोफेसर और मशहूर कवियत्री डॉ. मालिनी गौतम ने अपने रचना पाठ से खूब तालियां बटोरी।आभार प्रदर्शन सहायक प्राध्यापक कौशलेंद्र सिंह ने किया। रचनापाठ सत्र का संचालन मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की छतरपुर इकाई के अध्यक्ष नीरज खरे ने किया। यात्रा में प्रो. जसवीर त्यागी, युवा कवि और संस्कृतिकर्मी संतोष कुमार द्विवेदी, युवा गजलकार दौलत राम प्रजापति, महेश अजनबी आदि शामिल रहे।

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