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नई योजनाएं बनाने सरकार करा रही पशुधन की गणना

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पालतू के साथ-साथ आवारा पशुधन की भी होगी गिनती

छतरपुर। पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा 1 सितंबर से 31 दिसंबर 2024 तक 21वीं अखिल भारतीय पशुधन गणना कराई जा रही है, जिसका क्रियान्वयन छतरपुर जिले में भी हो रहा है। विभाग के छतरपुर कार्यालय में पदस्थ उपसंचालक डॉ आरए सेन ने बताया कि पशुपालन के क्षेत्र में नई योजनाएं बनाने, उसके प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी के लिए प्रशासनिक और भौगोलिक स्तर के डेटा की आवश्यकता होती है, जिसका मुख्य स्रोत पशुधन जनगणना है, जो हर 5 वर्ष में एक बार की जाती है। उन्होंने बताया कि पशुधन गणना से पहले विभागीय अधिकारियों और कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसमें गणना के संबंध में बिंदुवार जानकारी प्रगणक और सुपरवाईजर को प्रदान की गई।उपसंचालक डॉ आरए सेन ने बताया कि पशुधन गणना के तहत सभी पालतू और निराश्रित पशु-पक्षियों की गिनती की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थ हमारे स्टाफ, पशु चिकित्सा क्षेत्राधिकारी, गौसेवक, मैत्री और बीएस आदि को इस कार्य में सम्मिलित किया गया है। पशुगणना से विभाग को जो जानकारी मिलेगी, उसकी मदद से केंद्र और राज्य सरकार नई योजनाओं का निर्माण करेगी। गणना से यह भी पता चलता है कि हमारे क्षेत्र में किन पशु-पक्षियों की नस्ल घट रही है और किन पशु-पक्षियों की संख्या बढ़ रही है। इसी आधार पर पशु-पक्षियों की नस्ल को सहेजने और उन पर नियंत्रण की कार्ययोजना तैयार की जाती है। डॉ सेन ने बताया कि पशुधन गणना हेतु इस बार जिले के सभी विकासखंडों के लिए 141 प्रगणक और 13 सुपरवाईजरों का चयन किया गया है, जिसमें ज्यादातर विभागीय अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। सुपरवाईजर, प्रगणक द्वारा किए गए गणना कार्य में से 10-15 फीसदी डाटा का सत्यापन करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि गणना ठीक ढंग से की गई है। जहां पर कमी महसूस होगी वहां गौसेवकों की सहायता लिए जाने का प्रावधान है।इस तरह होती है पशुगणनाउपसंचालक डॉ आरए सेन ने बताया कि सबसे पहले हमारे प्रगणक गांव में जाकर यह पता करेंगे कि गांव में कुल कितने घर तथा कितने पशुपालक हैं। इसके बाद संबंधित घरों में जाकर हर वर्ग के पशु-पक्षियों (गाय, भैंस, बकरी, भेड़, कुत्ते, बिल्ली, मुर्गियां, सुअर, खच्चर सहित अन्य सभी प्रकार के पशु-पक्षी) की अलग-अलग गणना की जाएगी। इसके साथ ही यदि किसी पशुपालक के पास एक ही प्रजाति की अलग-अलग नस्ल के पशु या पक्षी हैं तो उनकी अलग-अलग गणना की जाएगी। दुधारु पशुओं की यह जानकारी भी एकत्रित की जाएगी कि कौन सा पशु कितना दूध दे रहा है, कितने शुष्क हैं, कितने बीमार हैं, कितने स्वस्थ हैं आदि। उन्होंने बताया कि पशुधन गणना के तहत पालतू और आवारा दोनों प्रकार के पशु-पक्षियों की गणना की जाना है। पहले विभागीय टीमें पालतू पशु-पक्षियों की गणना करेंगी और इसके बाद सड़कों, गौशालाओं सहित अन्य स्थानों पर मौजूद निराश्रित पशु-पक्षियों की गणना की जाएगी, यहां तक कि सड़कों पर घूमने वाला आवारा कुत्तों की गिनती भी पशुधन गणना के तहत की जाना है। डॉ. सेन के मुताबिक इस बार की पशुधन गणना में करीब एक दर्जन प्रजाति के पशु-पक्षियों की गणना होगी।पूर्व पशुधन गणना के मुताबिक जिले का पशुधनउपसंचालक डॉ आरए सेन ने बताया कि 5 वर्ष पूर्व जो पशुधन गणना कराई गई थी उससे प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक छतरपुर जिले में 6 लाख 61 हजार गाय, भैंस, 5 लाख से अधिक भेड़-बकरी, 5 सैकड़ा घोड़े, 7 सैकड़ा खच्चर के अलावा लगभग 13 से 14 हजार अन्य प्रजाति के पशु थे। अब नए आंकड़े इस बार की पशुधन गणना के बाद सामने आएंगे, जिनसे यह पता चलेगा कि जिले कौन से पशु-पक्षी बढ़े हैं और कौन से पशु-पक्षियों की संख्या में कमी आई है। इन्हीं नए आंकड़ों के आधार पर विभागीय मंत्रालय द्वारा नई योजनाएं तैयार की जाएंगी।पशुधन गणना से संबंधित नहीं है ईयर टैगिंगउल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 से पशुपालन एवं डेयरी विभाग की एक योजना के तहत पशुओं की ईयर टैगिंग भी कराई जा रही है, जिसे कई बार पशुपालक पशुधन गणना से संबंधित मानते हैं। उपसंचालक डॉ आरए सेन ने बताया कि ईयर टैगिंग का पशुधन गणना से कोई संबंध नहीं है। ईयर टैगिंग का कार्य विभाग द्वारा दूसरी योजना के तहत किया किया जा रहा है। जिन पशुओं के ईयर टैग गुम हो जाते हैं, उन्हें दोबारा टैग लगाए जाते हैं। इसके अलावा यदि कोई पशुपालक अपने पशु का विक्रय किसी अन्य व्यक्ति को कर दे और नया पशुपालक ईयर टैग बदलवाना चाहे तो बदलवा सकता है। ईयर टैगिंग का कार्य विभाग द्वारा पूरे वर्ष किया जाता है। गौशालाओं में रहने वाले निराश्रित पशुओं को भी ईयर टैग लगाए जाते हैं। इस वर्ष विभाग द्वारा 4 हजार से अधिक पशुओं को ईयर टैग लगाए गए हैं।पशुधन गणना में सहयोग करें पशुपालक1 सितंबर से शुरु हुई पशुधन गणना के लिए उपसंचालक डॉ आरए सेन ने जिले के समस्त पशुपालकों से अपील की है कि वे प्रगणकों से पशु-पक्षियों की जानकारी छिपाएं नहीं, बल्कि उन्हें सही और सटीक जानकारी दें। डॉ सेन ने बताया कि कई बार भ्रामक जानकारियां सुनकर पशुपालक डर जाते हैं और प्रगणकों को सही जानकारी नहीं देते या गणना में उनका सहयोग नहीं करते, इसलिए इस बार गणना से पूर्व हर गांव में मुनादी कराकर पशुपालकों को जागरुक कराने की कार्ययोजना बनाई गई है।

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