Home डेली न्यूज़ श्रृष्टि यदि व्यवस्था है तो ईश्वर उसके व्यवस्थापक हैं: उमेशआर्य प्रधान

श्रृष्टि यदि व्यवस्था है तो ईश्वर उसके व्यवस्थापक हैं: उमेशआर्य प्रधान

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आर्य समाज के वेद प्रचार सप्ताह वर्ष-2024 कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

महाराजपुर। आर्य समाज महाराजपुर द्वारा सोमवार को वेद प्रचार सप्ताह वर्ष-2024 का शुभारंभ किया गया है। कार्यक्रम के अंतर्गत पहले दिन श्रावणी पर्व रक्षाबंधन के मौके पर प्रात: 8 बजे आर्य समाज मंदिर में भव्य अनुष्ठान किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु व आर्य समाज के सदस्य शामिल हुए। कार्यक्रम पवित्र देव यज्ञ से प्रारंभ हुआ, जिसे आर्य समाज के पुरोहित भूदेव शास्त्री ने वैदिक ऋचाओं का गायन कर संपन्न कराया। इसके पश्चात एक विचार गोष्ठी हुई जिसमें आर्य समाज के विद्वानों द्वारा वेद ज्ञान की धारा से उत्प्रोत प्रवचन आम जनमानस तक पहुंचाये गए।गोष्ठी में आर्यवीरदल के अधिष्ठाता चितरंजन आर्य ने कहा कि आज समाज में लोग दुखी ज्यादा हैं जिसका प्रमुख कारण है अज्ञानता। वेद प्रचार सप्ताह ज्ञान का पर्व है, निश्चित रूप से यह समाज में खुशहाली और संपन्नता लाने वाला कार्यक्रम है क्योंकि इससे लोगों में जागरूकता आती है ज्ञान का विस्तार होता है। वहीं आर्य समाज के पुरोहित भूदेव शास्त्री ने अपने प्रवचनों में बताया कि यह श्रावणी पर्व प्राचीन काल से आ रही परंपरा है जिसमें चातुर्मास होने के कारण ऋषि मुनि लोग समाज गांव नगरों में जगह-जगह जाकर वेद ज्ञान का प्रचार प्रसार करते थे और समाज में सुख संपन्न लाने का कार्य करते थे किंतु आज समाज में व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास रुक गया है क्योंकि जगह-जगह धर्मावलोभी पाखंडी पाखंड फैलाकर लोगो को सच्चे ईश्वर की ओर जाने वाले रास्ते से अलग कर देते है। आर्य समाज के प्रधान उमेश कुमार आर्य ने बताया कि आज समाज में लोग अधिक भ्रमित हैं उन्हें सच्चे ईश्वर का ज्ञान नहीं है उन्होंने बताया कि ईश्वर इस संसार को चला रहा है संपूर्ण संसार एक व्यवस्थित तरीके से चल रहा है सूर्य पूर्व से निकलता है पश्चिम में अस्त होता है शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु,वर्षा ऋतु यह सभी अपने निश्चित समय से आती हैं और संपूर्ण जनमानस का कल्याण करते हैं। सभी ग्रह नक्षत्र अपनी धुरी पर सुव्यवस्था से घूम रहे हैं। इतनी अच्छी सुव्यवस्थित व्यवस्था बिना व्यवस्थापक के चलना संभव नहीं और इस सुंदर व्यवस्था को चलाने वाला व्यवस्थापक निश्चित रूप से परमपिता परमात्मा हैं यदि व्यक्ति उसके सच्चे स्वरूप को समझ जाए तो वह पंडित पुजारी मूर्तियां जादू टोना आदि के चक्करों में पड़कर अपने जीवन को तबाह होने से बचा सकता है। उन्होंने आर्य समाज के दूसरे नियम को बताते हुए कहा कि केवल नियम मंत्र पढऩे से या बोलने से किसी का उद्धार होने वाला नहीं है जब तक उसे नियम के भावार्थ को सही से नहीं समझेंगे तब तक परमात्मा से हमारा लगाव नहीं हो सकता और इस मानवजीवन का लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति नही हो सकती। आर्य समाज के पूर्व प्रधान दयाराम आर्य एवं पूर्व मंत्री इंद्रप्रकाश आर्य ने बताया कि वेद का ज्ञान शाश्वत है यह सबसे प्राचीनतम ग्रंथ है जिसमें कही गई एक-एक बात पूर्णता सत्य है विज्ञान भी इसमें लिखी हुई एक-एक बात को स्वीकार कर रहा है किंतु आज का समाज झूठे ग्रन्थों के चक्करों में पड़ कर इससे से दूर होता जा रहा है। मंत्री सूर्यसेन आर्य ने सभी आगंतुक महानुभावों का आभार व्यक्त किया और जहां जहाँ वेद प्रचार कार्यक्रम को आयोजित किया जाए, वहां आम जनमानस से उपस्थित रहकर पुण्य प्राप्त करने का आग्रह किया।

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