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एक तरफ लाड़ली बहनों को मुफ्त में बंट रहीं रेवडिय़ां

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दूसरी तरफ सरकार के काम में जुटीं बहनें मानदेय के लिए मोहताज

छतरपुर। मप्र में चुनावी जीत के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार के द्वारा प्रदेश की एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मुफ्त में ही हर महीने 1250 रूपए की राशि लाड़ली बहना योजना के तौर पर शुरू की गई थी। सरकार चुनाव के बाद भी मुफ्त की रेवडिय़ों पर हजारों करोड़ रूपए खर्च कर रही है लेकिन दूसरी तरफ प्रदेश की ऐसी महिलाएं जो सरकार का सहयोग कर रही हैं वे मानदेय के लिए भी तरस रही हैं। छतरपुर जिले की लगभग 6 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, आशा, ऊषा, सहयोगिनी पिछले 4 महीने से मानदेय का इंतजार कर रही हैं। सरकार बीच-बीच में इन्हें प्रोत्साहन राशि के तौर पर कुछ पैसा डाल देती है लेकिन पूरा पैसा नहीं दिया जा रहा है।छतरपुर जिले के साथ-साथ प्रदेश भर में यही हालात हैं। ये सरकारी सहयोगी महिलाएं शासन की विभिन्न योजनाओं में दिन-रात कार्यरत हैं। सरकार इन्हें 6 हजार रूपए से लेकर 15 हजार रूपए तक का अनिर्धारित मानदेय अलग-अलग कार्यक्रमों की प्रोत्साहन राशि के रूप में देती है। लगभग 4 महीने से इन्हें मानदेय नहीं मिल रहा है जिसके कारण महिलाओं को परिवार के भरण-पोषण में दिक्कतें आ रही हैं। महिलाओं ने अपने हक के लिए कई बार आवाज उठाई लेकिन फिर भी सरकार इनका पैसा नहीं दे रही है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि लाड़ली बहना जैसा मुफ्त की योजनाओं के लिए सरकार बड़े पैमाने पर खर्च कर रही है। यही वजह है कि सरकार के पास वेतन और मानदेय चुकाने के लिए पैसा नहीं बच रहा है। यह समस्या आने वाले दिनों में भी रह सकती है।इनका कहना-हमने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं का नवंबर माह तक का मानदेय आज ही दिया है। जल्द ही शेष राशि भी शासन से प्राप्त होने वाली है जिसे समय पर दिया जाएगा।राजीव सिंह, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, छतरपुरसरकार हमारी मांगों को अनदेखा कर रही है। महिलाएं बुरी तरह से परेशान हैं, कई घरों में खाने के लिए भी महिलाओं के पास पैसे नहीं बचे हैं, हम आंदोलन करके थक चुके हैं अब आमरण अनशन करेंगे।हीरादेवी चंदेलप्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष आशा, ऊषा महिला संगठन

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