कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश,,,, एल्बेंडाजोल गोली का चबा चबा कर खाएं
छतरपुर। छतरपुर जिले में फायलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम 10 से 25 फरवरी 2024 तक चलेगा। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कलेक्टर संदीप जी.आर. की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक सम्पन्न हुई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले को फायलेरिया रोग (हाथी पांव) से मुक्त करने के लिए सभी इस कार्यक्रम को सफल बनाएं। साथ ही आमजन को दवा सेवन कार्य में जागरूक करें। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को दवा सेवन करने के निर्देश दिए। कैसे और कितनी मात्रा में करें सेवन
छतरपुर जिले में 2 वर्ष से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी एवं एलबेन्डाजोल की 1-1 गोली, 6 से 14 वर्ष के बच्चों को डीईसी की 2 गोली तथा एलबेन्डाजोल की 1 गोली व 15 से या इससे अधिक वर्ष के लोगों को डीईसी की 3 एवं एलबेन्डाजोल की 1 गोली इस अभियान में खिलाई जाना है। एलबेन्डाजोल गोली कीटाणुनाशक है इसे चबाचबा कर खाना है। इस गोली को सेवन 0 से 2, गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्तियों, गर्भवती माताओं को नहीं करना है। आइवरमेक्टिन गोली की ऊंचाई के अनुसार कैसे करें सेवन
90-119 से.मी. लम्बाई के व्यक्ति को पीले रंग की 1 गोली, 120-140 से.मी. वाले को नीले रंग की 2 गोली, 141-158 से.मी. वाले को हरे रंग की 3 गोली तथा 158 से.मी. लम्बाई के ऊपर के व्यक्ति को बैगनी रंग की 4 गोलियों का सेवन खाना खाने के पश्चात् ही करना है। एमडीए के दौरान पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को आइवरमेक्टिन गोली का सेवन नहीं करना है। हाथी पांव बीमारी (लिम्फएडिय़ा) को कैसे पहचानें
स्वास्थ्य विभाग द्वारा ब्लॉक स्तर पर 7 हजार 72 दवा सेवक एवं 709 सुपरवाईजर बनाए गए हैं जो दवा का सेवन कराएंगे, साथ ही मॉनिट्रिंग अधिकारियों की भी नियुक्ति की गई है। दलों के द्वारा घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों से मिलना, फायलेरिया रोग से होने वाली परेशानी उसके बचाव के तरीके बताना, एम.डी.के महत्व व उसके फायदे को समझाना एवं दवा खिलाने के बारे में जानकारी दी जाएगी। आपके घर के आसपास अथवा ग्राम में किसी व्यक्ति के हाथ, पैर अथवा शरीर के अन्य भाग में सूजन का होना, पुरूष के अण्डकोष में सूजन का होना, शरीर के सूजन वाले हिस्से में बार-बार लालपन का होना, दर्द होकर बुखार आना तथा व्यक्ति की जांघो अथवा बगल की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन का होना हाथी पांव बीमारी के लक्षण में आते हैं।
बचाव एवं सावधानियां
फाइलेरिया मच्छरों के काटने से होता है और मच्छर गंदगी में पैदा होते हैं। इसलिए इस रोग से बचना है तो आसपास स्वच्छता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। दूषित पानी, कूड़ा जमने ना दें, जमे पानी पर कैरोसीन का छिड़काव करना, सोने के समय मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी का उपयोग करें।








