छतरपुर। करीब ढाई साल पहले छतरपुर में एक हवशी दरिंदे ने 3 साल की अबोध बच्ची को हवश का शिकार बना डाला था। इस घटना ने केवल छतरपुर, बल्कि पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामला न्यायालय में पहुंचा जहां तमाम सबूतों, गवाहों और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखकर सुनवाई हुई। सोमवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने घटना की निंदा करते हुए मामले के आरोपी को अंतिम श्वास तक जेल में रखे जाने (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है।
यह है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार 5 मई 2023 को 3 वर्षीय पीडि़ता अपने घर के बाहर खेल रही थी और उसकी मां घर के अंदर खाना बना रही थी। कुछ समय बाद जब बच्ची की आहट मिलना बंद हुई तो मां ने बाहर निकलकर देखा, जहां बच्ची नहीं थी। बच्ची के माता-पिता ने तलाश की तो गांव के एक व्यक्ति ने बताया कि घर के पास रहने वाले हीरालाल आदिवासी का दामाद अर्जुन बच्ची को कुल्फी दिलाने की बात कहकर अपने साथ ले गया है। माता-पिता के कहने पर हीरालाल ने अपने दामाद अर्जुन को फोन लगाया लेकिन उसने ठीक से बात नहीं की। काफी तलाश के बाद रात करीब 9 बजे बच्ची गांव के स्टॉपडेम के पास सूखे नाले में लहुलुहान अवस्था में पिता को बेहोश पड़ी मिली, होश में आने के बाद बच्ची ने अर्जुन की ओर इशारा किया। माता-पिता ने थाने जाकर अर्जुन के खिलाफ मामला पंजीबद्ध कराया। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया और अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
ढाई साल बाद बेटी को मिला न्याय
प्रकरण न्यायालय में पहुंचने के बाद अभियोजन की ओर से प्रभारी उपनिदेशक, विशेष लोक अभियोजक प्रवेश अहिरवार ने पैरवी करते हुये सभी सबूत एवं गवाह कोर्ट में पेश किये। श्री अहिरवार ने बताया कि प्रकरण में विचारण के उपरांत विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट श्रीमती कविता वर्मा, छतरपुर के न्यायालय ने आरोपी अर्जुन आदिवासी को पॉक्सो एक्ट की धारा 5एम/6 पॉक्सो एक्ट में आजीवन कारावास एवं 5000 रूपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई। इसके साथ ही पीडि़ता को नालसा की प्रतिकर स्कीम के तहत 3 लाख रूपये प्रतिकर दिये जाने का आदेश भी उन्होंने दिया है।









