Home डेली न्यूज़ सावन में आस्था का केन्द्र बना अचट्ट गांव का 1011 मुखी शिवलिंग

सावन में आस्था का केन्द्र बना अचट्ट गांव का 1011 मुखी शिवलिंग

44
0
Jeevan Ayurveda

नौगांव। मध्यप्रदेश का छतरपुर जिला हमेशा से अपने वैभवशाली इतिहास के लिए मशहूर रहा है। खजुराहो के मंदिर और बागेश्वर धाम के अलावा इस जिले में और भी कई ऐसे रहस्मयी मंदिर और किले हैं, जो लोगों के लिए दर्शनीय हैं। ऐसा ही एक मंदिर है, छतरपुर जिले की नौगांव जनपद के ग्राम अचट्ट का प्राचीन शिव मंदिर, जहां मौजूद शिवलिंग विश्व का इकलौता सहस्त्र मुखी शिवलिंग है। इस मंदिर को बैजनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है। अचट्ट का प्राचीन शिव मंदिर सावन के पवित्र माह में शिवभक्तों के लिए आस्था का केन्द्र बना हुआ है।
नौगांव से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित अचट्ट गांव के 80 वर्षीय रमेश चंद्र साहू बताते हैं कि पहले गांव को अचलपुर के नाम से जाना जाता था, कालांतर में इसका नाम अचट्ट पड़ा। उन्होंने बताया कि मंदिर का सहस्त्र मुखी शिवलिंग कई वर्ष पहले तालाब की खुदाई के दौरान मिली थी, जिसे गांव वालों ने पहाड़ी पर बने मंदिर में स्थापित किया। मंदिर के चारों ओर तालाब, मां पार्वती का मंदिर, नंदी की मूर्ति स्थापित है। वहीं पहाड़ी के नीचे बालाजी की विशाल प्रतिमा पूरे परिसर को आध्यात्म का केंद्र बनाती है। गांव का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, यहां खुदाई में विष्णु भगवान की चंदेलकालीन मूर्ति भी मिली है। कई बार खुदाई के दौरान यहां 10वीं और 11वीं सदी की दर्जनों मूर्तियां निकली हैं, जिसके चलत अब इस गांव में खुदाई करने से पहले पुरातत्व विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है।
मंदिर के तालाब में स्नान करने से कुष्ठ रोग ठीक होने की मान्यता
वहीं मंदिर के पुजारी बताते हैं कि गांव के एक रैकवार परिवार को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर पहाड़ी के पास खुदाई करने को कहा था, जिसके बाद यह अद्भुत शिवलिंग मिली थी। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के सामने वाले तालाब में 7 सोमवार या शनिवार को स्नान करने और जल चढ़ाने से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है। पुजारी का यह भी दवा है कि हर रात एक विशाल सर्प शिवलिंग के दर्शन को आता है। पुजारी बताते हैं कि गांव में आधा सैकड़ा तालाब और प्राचीन बावडिय़ां पुरातात्विक महत्व को दर्शाती हैं। कुछ इतिहासकार बताते हैं कि यह गांव महाभारत काल से अस्तित्व में रहा है। अचट्ट गांव में आज भी इतिहास से जुड़ीं कई निशानियां मौजूद हैं, जो अपने प्राचीन अस्तित्व की गवाही देता है। यहां भगवान शिव, भगवान विष्णु, भगवान हनुमान समेत कई देवी-देवताओ की ऐसी मूर्तियां निकल चुकी हैं, जो और कहीं नहीं देखी गईं। माना जाता है कि अचट्ट गांव हजारों वर्ष पहले महाभारत काल में एक वैभवशाली नगर हुआ करता था, जिसका पुराना नाम अक्षत था फिर अचलपुर हुआ और आज अचट्ट के नाम से प्रचलित है। इस गांव में खुदाई के दौरान चंदेलकालीन भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति भी निकल चुकी है. ये मूर्ति बेहद मनमोहक है, जो गांव के एक प्राचीन मंदिर में मौजूद है। भगवान विष्णु की ये प्रतिमा लगभग 5 से 6 फीट ऊंची है। ठोस पत्थर से निर्मित भगवान विष्णु की इस प्रतिमा में भगवान बड़े नेत्रों के साथ दर्शन देते हैं।

Ad
Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here