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जंगल में अवैध उत्खनन कर रही मशीन को वन विभाग ने पकड़ा

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छतरपुर। वन परिक्षेत्र बक्सवाहा के कक्ष क्रमांक 257 में 13 मार्च 2026 को जेसीबी मशीन से अवैध खुदाई और अतिक्रमण का मामला सामने आने के बाद वन विभाग ने मशीन जब्त कर प्रकरण कायम किया। इस घटना में पीओआर क्रमांक 954/22 दर्ज की गई तथा भारतीय वन अधिनियम 1927धारा 33(1) ग़ के तहत कार्रवाई शुरू की गई। हालांकि अब इस पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या वन क्षेत्र की वास्तविक तबाही को कम करके दिखाने की कोशिश की जा रही है। क्षेत्र के छुटभैया नेता मामले को निपटाने में लगे हैं, हालांकि विभागीय अधिकारी किसी भी रियायत से इनकार कर रहे हैं।विवेचना के दौरान सामने आया कि लगभग आधा हेक्टेयर वन भूमि को भारी नुकसान पहुंचाया गया और भूमि का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बदल दिया गया। क्षतिग्रस्त वन संपदा में 0-20 गोलाई की करीब 500 झाडिय़ां नष्ट हुईं, 21-30 गोलाई के 25 पलास के पेड़, 31-45 गोलाई के 15 पलास के पेड़, 46-60 गोलाई के 2 पलास के पेड़ तथा एक 46-60 गोलाई का काकर का पेड़ शामिल है। इतनी बड़ी क्षति के बावजूद आरोप है कि पीओआर में भारी और बड़े पेड़ों की वास्तविक क्षति का पूरा विवरण नहीं दर्ज किया गया।सूत्रों के अनुसार मौके पर पेड़ों की विधिवत नाप नहीं की गई और क्षति का संपूर्ण ब्यौरा पीओआर में शामिल नहीं हुआ। स्थल की जीपीएस/जीएचएस रीडिंग सहित फोटो और वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। यदि ये तथ्य सही साबित होते हैं तो यह मामला मात्र वन अपराध नहीं रह जाता, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही या संभावित मिलीभगत की आशंका को भी जन्म देता है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज है कि क्या प्रकरण को सीमित धाराओं में दर्ज कर गंभीर नुकसान को हल्का दिखाने का प्रयास किया गया। इस मामले में जब बक्स्वाहा रेंजर लव प्रताप सिंह को फोन किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।कार्रवाई मुख्य वन संरक्षक के निर्देश पर उप वन मंडल अधिकारी रामकुमार एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी लव प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में की गई। जब्ती की कार्यवाही बीट प्रभारी भागीरथ रैकवार एवं बीट गार्ड राजेश बिल्थरे द्वारा अंजाम दी गई। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या पूरे नुकसान का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा, क्या उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच बैठाई जाएगी या मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।जनता पूछ रही है कि जंगल बचेगा या फाइलें। लगभग आधा हेक्टेयर जंगल की क्षति, सैकड़ों झाडिय़ों का विनाश, मापन प्रक्रिया पर सवाल और दर्ज धाराओं को लेकर उठती शंकाएं — यह मामला अब पारदर्शिता और जवाबदेही की कड़ी परीक्षा बन चुका है।इनका कहना-अवैध उत्खनन कर रही मशीन पकड़ी गई थी। कार्रवाही की गई, मशीन छोडऩे की खबर गलत है।नरेश यादव, सीसीएफ, वन विभाग, छतरपुर

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