Home डेली न्यूज़ छतरपुर की सड़कों पर दौड़ी पुलिस और माइनिंग टीम

छतरपुर की सड़कों पर दौड़ी पुलिस और माइनिंग टीम

29
0
Jeevan Ayurveda

छतरपुर। जिले में फल-फूल रहे अवैध रेत कारोबार की कमर तोडऩे के लिए प्रशासन ने सोमवार को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। माइनिंग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में दबिश देकर दो दर्जन से अधिक अवैध बालू से भरे ट्रैक्टरों को जब्त किया है। इस औचक कार्रवाई से बालू माफियाओं और अवैध परिवहन में लिप्त लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।कलेक्टर और एसपी के कड़े निर्देशों के बाद सोमवार सुबह संयुक्त टीम ने गायत्री मंदिर के पास स्थित मुख्य बालू मंडी, महोबा रोड और राजनगर रोड पर एक साथ धावा बोला। इन इलाकों में लंबे समय से अवैध रेत के भंडारण और बिक्री की शिकायतें मिल रही थीं। जैसे ही अधिकारियों का अमला मौके पर पहुंचा, मंडी में भगदड़ मच गई। कई ट्रैक्टर चालक कार्रवाई के डर से अपने वाहनों को चालू हालत में ही सड़क पर छोड़कर गलियों में फरार हो गए।संयुक्त टीम का कड़ा रुख, जारी रहेगी कार्रवाईइस विशेष अभियान में सिटी कोतवाली, सिविल लाइन और ओरछा रोड थाना पुलिस के साथ माइनिंग इंस्पेक्टर और राजस्व विभाग के अधिकारी मुस्तैद रहे। अधिकारियों ने बताया कि जब्त किए गए सभी ट्रैक्टरों को संबंधित थानों में खड़ा कराया गया है। फरार चालकों और वाहन स्वामियों की पहचान की जा रही है, जिनके विरुद्ध खनिज अधिनियम और चोरी की धाराओं के तहत प्राथमिकी (स्नढ्ढक्र) दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए रेत के अवैध धंधे में लगे लोगों को सख्त चेतावनी दी है। अधिकारियों का कहना है कि जिले में कहीं भी अवैध उत्खनन या परिवहन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों और नदियों के घाटों तक भी विस्तारित किया जा सकता है।खनन और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठते गंभीर सवालअवैध परिवहन में पकड़े गए ट्रैक्टरों के मामले में मायनिंग और परिवहन विभाग की भूमिका अब सवालों के घेरे में है। नियमानुसार, मायनिंग विभाग को यह जांचना अनिवार्य है कि पकड़े गए वाहन का रजिस्ट्रेशन कृषि कार्य के लिए है या व्यावसायिक उपयोग के लिए, जिसके लिए परिवहन विभाग को पत्र जारी किया जाना चाहिए। यदि कृषि कार्य के लिए पंजीकृत वाहन का व्यावसायिक उपयोग पाया जाता है, तो रजिस्ट्रेशन की तारीख से अब तक की व्यावसायिक फीस और पेनल्टी वसूलने का प्रावधान है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या मायनिंग विभाग बिना परिवहन रिपोर्ट के इन वाहनों को कैसे छोड़ देता है और क्या बिना रजिस्ट्रेशन वाली ट्रॉलियों की सुपुर्दगी करना नियमसंगत है। अब तक किसी भी वाहन पर राजसात की सख्त कार्यवाही न होना और विभागों के बीच इस समन्वय की कमी प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

Jeevan Ayurveda Clinic

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here