राजनगर। छतरपुर जिले के राजनगर विकासखंड के ललपुर शासकीय हाई स्कूल में 11 शिक्षकों में से 6 शिक्षकों को बीएलओ के रूप में एसआईआर/निर्वाचन कार्य में लगा दिया गया है। इसके कारण कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। बोर्ड परीक्षाएँ नजदीक होने के बावजूद विज्ञान, संस्कृत, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के शिक्षक ड्यूटी पर भेजे जाने से छात्रों की कक्षाएँ एक साथ संचालित करनी पड़ रही हैं।
जब छात्रों से बात की गई, तो लगभग सभी ने बताया कि कई विषयों की क्लासें एक सप्ताह से लेकर एक महीने तक नहीं लगी हैं। स्कूल के अतिथि शिक्षक महेश साहू ने बताया कि तीन शिक्षक बीएलओ ड्यूटी में, दो प्रशिक्षण केंद्र में और प्राचार्य मीटिंग में हैं। 6वीं से 8वीं के बच्चों की परीक्षाएँ सोमवार से शुरू हो रही हैं। स्टाफ कम होने से पढ़ाई में व्यवधान होना स्वाभाविक है।
अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि 10वीं बोर्ड परीक्षा बेहद समीप है और ऐसे समय एक-एक घंटे की पढ़ाई भी विद्यार्थियों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होती है। उनका आरोप है कि शिक्षकों को निर्वाचन कार्य में भेजकर पढ़ाई को अधर में छोड़ दिया गया है, जो बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है।
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि बीएलओ ड्यूटी सरकारी आदेश है, जिसे कलेक्टर छतरपुर, एसडीएम राजनगर और शिक्षा विभाग के निर्देशों के तहत पालन करना अनिवार्य है। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि निर्वाचन जैसे कार्यों में हमेशा शिक्षकों को ही क्यों लगाया जाता है, जब अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी नियुक्ति संभव है?
उधर, अतिथि शिक्षकों ने भी अपनी अलग पीड़ा जताई है। उनका कहना है कि हम रोज स्कूल आकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन दो महीने से वेतन नहीं मिला है। परिवार का बजट बिगड़ गया है और आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है। कई बार आदेश जारी होने के बावजूद बाबू बताते हैं कि बजट खत्म हो गया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से जल्द मुक्त किया जाए, ताकि बच्चों की नियमित पढ़ाई सुधर सके और बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सके।









