छतरपुर। पंचायती राज व्यवस्था में सरपंचों को सुनियोजित तरीके से प्रताडि़त किए जाने के विरोध में गुरूवार को जिले के सरपंचों ने प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को 32 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र कौशिक का कहना है कि कई दिनों से वे अपनी समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रख रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई सुनवाई नहीं मिल रही। सरपंचों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों से ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सुनियोजित तरीके से विकास कार्यों को रोकने के लिए उपयंत्रियों की हड़ताल करवाई गई है।
सरपंचों ने बताया कि सब इंजीनियर स्वयं हड़ताल खत्म कर काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन सरकार उन्हें जबरन छुट्टी पर भेज रही है। इस दौरान सरपंचों ने ज्ञापन में कई अहम मांगें रखीं जिनमें उपयंत्रियों की हड़ताल वापस कराना, मनरेगा योजना को खत्म कर मजदूरी बाजार दर पर देना, ग्राम पंचायतों का एसओआर शहरी एसओआर के बराबर करना, पीएम आवास योजना में पुराने सर्वे को आधार बनाना, लाड़ली बहना योजना में वंचित बहनों के नाम जोडऩा, पशु शेड, मेढ़ बंधान, सुदूर सड़क और शांतिधाम जैसी योजनाएं लागू करना, पंचायत कर्मचारियों को साधारण नियंत्रण प्रदान करना, ग्राम पंचायतों में स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाना, किसानों को खाद की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित कराना, शौचालय योजना का सर्वे कराना, धारा 40 के तहत सरपंचों को अपमानित करने की प्रक्रिया बंद करना, सरपंचों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पुन: जांच कराना शामिल है।
सरपंचों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देंगे। उनका कहना है कि सरकार को ग्रामीण विकास की उपेक्षा अब महंगी पड़ सकती है। आवेदन देने के दौरान दर्जनों सरपंच एवं सरपंच प्रतिनिधि मौजूद रहे।










