महाराजपुर। तहसील क्षेत्र के किसान इन दिनों राजस्व एवं वन विभाग के विवादों के चलते भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। रवि मौसम की जुताई का समय नजदीक आते ही किसान अपनी पैतृक एवं राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि पर खेती-किसानी का कार्य कर रहे हैं। लेकिन छतरपुर जिले के वनमंडल परिक्षेत्र के वनरक्षक एवं डिप्टी रेंजर द्वारा किसानों को खेतों की जुताई से रोका जा रहा है।
किसानों का कहना है कि वे 1938 से लेकर अब तक की भूमि स्वामित्व के दस्तावेज प्रस्तुत कर चुके हैं, फिर भी अधिकारियों द्वारा उनकी कोई बात नहीं सुनी जाती। आरोप है कि ट्रैक्टर से जुताई करने पर वन भूमि का हवाला देकर किसानों को धमकाया जाता है और सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। जो किसान शुल्क नहीं दे पाते उनके कृषि यंत्र जब्त कर कार्यवाही की जाती है। शिकायत करने पर किसानों को और अधिक डराया-धमकाया जाता है।
इस मनमानी रवैये से तहसील क्षेत्र के किसानों में गहरा आक्रोश है। कई किसानों ने महाराजपुर जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत कर उचित समाधान की मांग की है। यही हाल टटम एवं नवादा मौजा के किसानों का भी है। इस संबंध में शिवसेना पार्टी द्वारा छतरपुर में ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
राजस्व-वन विभाग की मिलीभगत से उत्खनन चरम पर
महाराजपुर तहसील क्षेत्र में राजस्व एवं वन विभाग की मिलीभगत से पहाडिय़ों और नदियों में अवैध उत्खनन धड़ल्ले से जारी है। नेगुवां, सांवरी, लवनिया समेत कई क्षेत्रों की पहाडिय़ों पर उत्खनन का कार्य वर्षों से चल रहा है। आरोप है कि अधिकारियों की सांठगांठ से माफियाओं से सुविधा शुल्क लेकर अवैध उत्खनन को खुला संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे शासन की राजस्व आमदनी को भारी नुकसान हो रहा है।
वन विभाग का पक्ष
वन विभाग के रेंजर बुद्ध सेन कोल ने कहा कि जिन किसानों को समस्या है, वे विभाग को आवेदन दें। राजस्व और वन विभाग द्वारा संयुक्त सीमांकन कराकर किसानों की समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।









