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महाकाल की नगरी उज्जैन में मिली बुंदेली संत पाराशर जी को जगद्गुरू की उपाधी

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टीकमगढ़ के हीरानगर ग्राम में जन्में सच्चिदानंद पाराशर जी
टीकमगढ़। यूं तो बुंदेलखंंड की पावन धरा टीकमगढ़ के गांवों ने एक से बढक़र एक संत दिए हैं, जिनमें अचर्रा से संतश्री राजेन्द्र दास जी महाराज, छिपरी से संत श्री रावतपुरा सरकार, सांध्वी सुश्री उमा भारती जी के अलावा अनेक नाम हैं, जिन्होंने यहां के गांवों से निकलकर देश-दुनिया में अपनी भक्ति और साधना से बुंदेली धरा का नाम रोशन किया है। आज विश्व कल्याण की भावना से यहां के संत देश भर में अपने प्रवचनों से लोगों का भला करते आ रहे हैं। इन दिनों निकटवर्ती ग्राम हीरानगर के ब्राह्मण परिवार में जन्में सच्चिदानंद पाराशर जी का नाम सम्मान के साथ लिया जा रहा है। उन्हें महाकाल की नगरी उज्जैन में सप्तऋषि पीठाधीश्वर की उपाधी प्रदान की गई है। बताया गया है कि जिला टीकमगड के छोटे से गाँव हीरानगर में ब्राह्मण परिवार में जन्में सच्चिदानंद पाराशर ने अपने गाँव एवं अपने जिले का नाम रोशन किया है। देश-विदेश में भागवत कथा, राम कथा के साथ समाज को नशामुक्त बनाने के लिए पूरे भारत में नशा मुक्ति अभियान चला रहे हैं। अभी तक करीब दस हजार से ज्यादा लोग शराब आदि नशा छोडऩे का संकल्प कर चुके है। सनातन को मजबूत करने के लिए सनातन जोड़ो अभियान भी चला रहे हैं, जिससे लाखों लोग जुड़ रहे हैं। बताया गया है कि 20 जून को उज्जैन में सप्तऋ षि अखाड़े की बैठक में संतो द्वारा सप्तऋ षि पीठाधीश्वर जगदगुरु की उपाधी प्रदान की गई। उन्होंने जगदगुरु बनने के बाद भगवान महाकाल का दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उज्जैन सिंहस्थ महाकुम्भ की योजना तैयार की गई।
नशा से किया हजारों को मुक्त-
महाराज सच्चिदानंद जी ने बताया कि उन्होंने वाल्यकाल से ही वृंदावन में रहकर शिक्षा ग्रहण की और उसके बाद से वह श्रीमद् भागवत कथा एवं श्रीराम कथा करने के साथ ही समाज को जागरूक करने में लगे हुए हैं। उन्होंने देश भर में अलख जगाकर लोगों को नशा से मुक्त कराने का जो सिलसिला शुरू किया, वह जारी बना हुआ है। इसके साथ ही गौ सेवा करने तथा गौ पालन करने का भी आह्वान किया जा रहा है। बुंदेलखंड में भी अब तक उन्होंने झांसी, छतरपुर एवं सागर में नशा मुक्ति अभियान चलाकर सैकड़ों लोगों को नशा से मुक्त कराया। उन्होंने बताया कि वह ऋषि परंपरा के संत हैं। रामानुज संप्रदाय के सभी संत गृहस्थ जीवन में रहते हुए सनातन का प्रचार प्रसार करते हैं। इन दिनों वह अपना धाम जयपुर में बनाए हुए हैं, जहां से वह देशाटन कर नशा मुक्ति अभियान चलाते आ रहे हैं।

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