
छतरपुर। संगम सेवालय द्वारा गौरैया संरक्षण के महत्व पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें प्रकृति संरक्षण और गौरैया के विलुप्ति संकट पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में न्यायाधीश विक्रम भार्गव, डॉ. बी.एस. राजपूत, डॉ. दीप्ति शर्मा, शंकरलाल सोनी, सुरेंद्र अग्रवाल, अजय गुप्ता और गोविंद असाटी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।संगोष्ठी में वक्ताओं ने गौरैया चिडिय़ा के महत्व, इसके तेजी से कम होती संख्या के कारणों और इसके संरक्षण के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि शहरीकरण, मोबाइल टावरों से निकलने वाले रेडिएशन, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से गौरैया की संख्या में गिरावट आई है। उन्होंने घरों में पक्षियों के लिए दाना-पानी रखने, प्राकृतिक घोंसले तैयार करने और हरियाली को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर जोर दिया।इस अवसर पर विपिन अवस्थी, अंजू अवस्थी, लखनलाल लाल अग्रवाल, प्रकाश जैन, देवकीनंदन साहू, किरण मिश्रा, अंजना साहू, नीतू सिंह, दिल्लाराम अहिरवार, वंदना वर्मा, डॉ. स्वतंत्र शर्मा अशोक कटारा, राजाराम विश्वकर्मा सहित अनेक समाजसेवी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में एंजिल पब्लिक स्कूल और एप्पल पब्लिक स्कूल के स्टाफ ने भी सहभागिता की और छात्रों को गौरैया संरक्षण के प्रति प्रेरित किया।संगम सेवालय के इस प्रयास को समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया। संस्था के पदाधिकारियों ने सभी से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं और गौरैया जैसी मासूम चिडिय़ा को बचाने के लिए छोटे-छोटे प्रयास करें।








