

टीकमगढ़। पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। शिक्षा के साथ ही समाज हित में उनके द्वारा किए गए कार्यों ने टीकमगढ़ सहित समूचे बुंदेलखंड के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी नीतियां और सिद्धांत अनुकरणीय रहे हैं। कुंडेश्वर को उन्होंने अपनी कर्मभूमि ही नहीं बनाया, बल्कि यहां शिक्षण संस्थान डाइट सहित अन्य कार्यों को बखूबी अंजाम दिलाया। यह विचार जिले के जाने माने व्यंगकार रामगोपाल रैकवार ने यहां कुंडेश्वर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। समाचार पत्र मधुकर के संपादक एवं बीटीआई के प्रथम प्राचार्य पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी की जयंती डाइट कुंडेश्वर में मनाई गई। इस दौरान अनेक वक्ताओं ने पंडित जी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डालने के साथ की उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
डाइट प्राचार्य एसएस पटैरिया की अध्यक्षता में डाइट संस्थान की प्रतिमा स्थली पर जयंती समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अवध विहारी श्रीवास्तव साहित्यकार व कवि रहे। इसके साथ ही विशेष अतिथि के रूप में महेन्द्र पोतदार एवं कवि दीनदयाल तिवारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंच संचालन अरविंद द्विवेदी ने किया। उन्होंने संस्था की स्थापना में बनारसी दास जी के योगदान को विस्तार से बताया और उनके कार्यों के बारे में अतिथियों को जानकारी दी। इस अवसर पर सियाराम अहिरवार, पत्रकार प्रदीप खरे, केएल टेलर वृक्षाम्बर महाराज, गीतिका वेदिका, बैदेही त्रिपाठी, एके द्विवेदी, राजा सिरवैया, रामजी तिवारी, राना लिधौरी, आरके पुरोहित, रविन्द्र यादव, शकूर मुहम्मद, हरेन्द्र पाल सिंह, रामगोपाल रैकवार सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान वक्ताओं ने डाइट से पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी का नाम हटा दिए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए उनके नाम से डाइट संस्था को किए जाने पर जोर दिया। इस मांग का उपस्थित साहित्यकारों एवं कवियों ने समर्थन किया। पूर्व में संचालित बुनियादी प्रशिक्षण संस्थान पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी के नाम से संचालित रही। लेकिन डाइट बनने के बाद से ही पंडित जी का नाम गायब कर दिया गया। यहां बता दें कि उनके ही प्रयासों से यहां राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद का आगमन ही नहीं हुआ, बल्कि जिले को राजेन्द्र अस्पताल, राजेन्द्र सागर बांध, राजेन्द्र पार्क की सौगात दी गई। पंडित जी ने मधुकर का संपादन करते हुए बुंदेलखंड की तस्वीर बदलने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने पत्रकारों के हितों का भी ध्यान रखा और प्रदेश में संगठन को मजबूती प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान स्वागत भाषण प्रकाश जी नायक ने दिया एवं अतिथियों का स्वागत अशोक द्विवेदी ने किया। समारोह के अंत में आभार व्यक्त संस्था के प्राचार्य एसएस पटैरिया ने किया।
चाय की चुश्कियां और पापड़ का स्वाद-
पंडित बनारसी दास चतुर्वेदी जी को पंच-प बेहद पसंद थे। इनमें पापड़, पपीता, पान, परोड़ा एवं पलाश शामिल रहे। उनके जयंती समारोह के बीच उनकी खास पसंदों में शामिल चाय की चुश्कियों के बीच पापड़ का अतिथियों ने स्वाद लिया। इसके साथ ही स्वल्पाहार का भी आयोजन किया गया। बताया गया कि उनके द्वारा यहां आजादी के पावन अवसर पर चंदन का रोपण किया गया था, जिसे अब चंदन माफियाओं द्वारा काट लिया गया है। लेकिन पीपल एवं पलाश अब भी यहां लगे हुए हैं।
पापट संग्रहालय की भी हुई चर्चा-
साहित्कार एवं मधुकर के संपादक रहे पंडित बनारसीदास चतुर्वेदी का प्रथम निवास जो अब पापट संग्रहालय का रूप ले चुका है। पत्रकार प्रदीेप खरे ने पापट संग्रहालय की दशा सुधारे जाने एवं यहां महिलाओं के लिए सर्व सुविधायुक्त सुलभ काम्पलेक्स बनाए जाने पर जोर दिया। श्री खरे ने कहा कि यहां मौजूद मूर्तियों पर नाम एवं सन् आदि का उल्लेख किया जाना जरूरी है, जिससे पर्यटकों को पर्याप्त जानकारी हो सके। पूर्व में यहां मूर्तियों पर देवी-देवताओं के नाम एवं सन् आदि लिखे हुए थे, जो मूर्तियों के स्थानान्तरित होने के बाद से हट चुके हैं। इसके साथ ही राजेन्द्र सागर बांध के सौंदर्यीकरण एवं गहरीकरण पर भी जोर दिया गया, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों के लिए एक और स्थान उपलब्ध कराया जा सके।








