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इंसानों में हो संघर्षों से जूझकर मंज़िल तक पहुँचने की कला -के के श्रीवास्तव संघर्ष पुरुष गंगा प्रसाद बख़्शी की पुण्यतिथि मनी,दी श्रद्धांजलि

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टीकमगढ़। प्रदीप खरे, संघर्षों से जूझकर मंजिल तक पहुंचने की कला हर इंसान में होना चाहिए। संघर्षों के घबराकर हार मानने वाले इंसान कभी भी उन्नति नहीं कर सकते। संघर्षों के जूझने और लगातार उन्नति के पथ पर अग्रसर रहने की कला मुझे मेरे पिता से विरासत में मिली है। सादगी और प्रेम की मूरत रहे पिता के बताए रास्ते पर चलकर ही आज आप सबका आशीर्वाद मिल रहा है। यह विचार यहां संघर्ष पुरूष स्वर्गीय गंगा प्रसाद बख्शी जी की पुण्य तिथि के अवसर पर उनके पुत्र केके श्रीवास्तव पूर्व विधायक ने व्यक्त किए। स्थानीय शान-ए-पार्क महेन्द्र सागर तालाब पर जाने माने साहित्यकार स्वर्गीय श्री गंगा प्रसाद बख्शी की पुण्य तिथि मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित राम सहाय रावत कुम्हैड़ी ने की। वह पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव के कुल गुरू भी हैं। अपने संबोधन में पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव ने कहा कि विचार कभी नहीं मरते, वह एक न एक दिन सार्थक जरूर होते हैं। उन्होंने अपने पिता के बताए रास्ते पर चलकर ही नगर पालिका अध्यक्ष एवं विधायक रहते हुए जो शहर और क्षेत्र का विकास किया है, वह आज सभी के सामने हैं। आज क्षेत्र को नीरा नदी के अभाव के कारण संकट से जूझना पड़ रहा है। चंदेल कालीन तालाबों की दुर्दशा ने किसानों की दशा को खराब किया है। अलग-अलग विचारों के बाद भी सभी राजनेताओं एवं समाजसेवियों को जल संकट का स्थाई हल खोजने और चंदेली तालाबों की दशा सुधारने के लिए एक साथ आगे आना होगा। पर्यावरण संकट से निबटने के लिए भी हम सभी को एक साथ आकर कार्य करने की आवश्यकता है। श्री श्रीवास्तव ने कहा कि वह जल्दी ही नदियों को नीर से भरा रखने एवं तालाबों की मरम्मत किए जाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। इसमें सभी का सहयोग जरूरी है। इस अवसर पर पूर्व पार्षद एवं बीजेपी के वरिष्ठ नेता मनोज देवलिया ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए स्वर्गीय श्री बख्शी जी को एक आदर्श शिक्षक एवं सादगी की प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि उनके पुत्रों में भी उनकी झलक स्पष्ट दिखाई देती है। संस्कृति, सभ्यता एवं कला के क्षेत्र में उनकी ही भांति उनके पुत्र आज आगे बढ़ रहे हैं। श्री देवलिया ने श्री बख्शी जी के जेष्ठ पुत्र राम कुमार की सादगी और शिव कुमार की कला की भी सराहना की। इसके साथ ही श्री श्रोती जी ने भी स्वर्गीय श्री बख्शी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप खरे अधिमान्य पत्रकार ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में शिव कुमार श्रीवास्तव ने निर्गण भजन सुनाया। उपस्थितजनों ने श्री बख्शी जी की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सुनील होंडा, पत्रकार नरेन्द्र अडज़रिया, तारिक खान, बीडी यादव, मेहबूब खान, अरविंद श्रीवास्तव, अब्बास खान, शांतनु बख्शी, चंद्र प्रकाश पटैरिया, कल्लू विश्वकर्मा, रामेश्वर श्रोती, बद्री अग्रवाल, जितू सेन बीज वाले, मनमोहन तिवारी, विनोद पस्तोर, अज्जी मोदी, सुनील जैन, नारायण सिंह, सत्य प्रकाश खरे, भरत लुकमान, आनंद रजक, नसीर, नसीम सहित अनेक नागरिक उपस्थित रहे।

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