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नौगांव एसडीएम का अजीब कारनामा

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करोड़ों की जमीन पर स्वामित्व का आदेश बना चर्चा का विषय

नौगांव। नौगांव अनुविभागीय राजस्व अधिकारी ने शहर के कंचन मैरिज गार्डन के पास की 2.125 हेक्टेयर भूमि के मामले में सिविल न्यायालय की डिक्री के खिलाफ हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से हारे व्यक्तियों को भूमि स्वामी घोषित करने का आदेश जारी किया है। उक्त मामले की जब छतरपुर एडीएम कोर्ट में शिकायत हुई तो एडीएम ने मामले में आगामी समय तक के लिए स्थगन आदेश जारी कर दिया है। फरियादी राकेश यादव ने नौगांव एसडीएम विशा माधवानी के द्वारा सिविल मामले की डिक्री न मानने के लिए कोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला भी हाई कोर्ट में दायर किया है जो विचाराधीन है, इन सबके बीच नौगांव एसडीएम ने सिविल न्यायालय के फैसले को कायम रखने के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ जाकर विधि विरुद्ध आदेश पारित कर दिया।
ये है मामला
जानकारी के मुताबिक नौगांव एसडीएम ने बीती 22 अक्टूबर 2024 को एक भूमि के प्रकरण में सुनवाई के बाद आदेश जारी करते हुए भूमि खसरा नंबर 265,266, 267, 268, 269, 270 मौजा नौगांव की  कुल 2.125 हेक्टेयर भूमि को ममता, राजेश्वरी पुत्री लक्ष्मणिया के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है। अनावेदक राकेश यादव, राजकुमार यादव आदि ने बताया कि उक्त भूमि में नाम दर्ज करने के लिए आवेदन भी नहीं किया है इसके बाद भी प्रशासन के अधिकारियो ने उक्त लोगों के नाम दर्ज कर दिए हैं।
फरियादी राकेश यादव ने उक्त मामले की एडीएम से शिकायत करते हुए बताया कि भूमि खसरा नंबर 265, 266, 267, 268, 269, 270 मौजा नौगांव की कुल 2.125 हेक्टेयर भूमि सन 1939 -1940 में उक्त भूमि मुरलीधर सक्सेना और मुलू यादव पिता गिरधारी लाल के नाम राजस्व रिकॉर्ड में 1/2 और 1/2 दर्ज थी।
जमीन खसरा नंबर 265, 266, 267, 268, 269, 270, कुल किता 06 रकवा 2.125 हेक्टेयर जिसमें 1/2 मुरलीधर तनय बेनीप्रसाद सक्सेना एवं 1/2 मुलू बल्द गिरधारी हिस्सेदार सन 1939-40 से थे। जिसमे मुरलीधर सक्सेना ने अपना हिस्सा 1/2 रकवा 1.062 हेक्टेयर सन 1966 में नत्थू एवं जवाहर को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के माध्यम से बेच दिया। नत्थू एवं जवाहर ने अपना हिस्सा, पारिवारिक बटवारा में मुन्नीलाल को दे दी। इसके बाद मुलू की मृत्यु के बाद उनके वारिस छुटिया पिता मुलुआ वारिस हुए। सन 1951 में छुटिया ने अपना 1/2 हिस्सा अनंतराम के पास 2 सौ रूपये में गिरवी रखा था, यही गिरवी  हिस्सा छुटिया ने मुन्नीलाल को सन 1981 में रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के माध्यम से हिस्सा बेच दिया। जिसके बाद अनंतराम के वारिसों ने जमीन में नाम दर्ज करने सिविल न्यायालय में प्रकरण दायर किया किया। प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग 1 ने मुन्नीलाल के विरुद्ध आदेश किया तो मुन्नीलाल ने मामले में अपील प्रथम जिला न्यायाधीश नौगांव में सुनवाई के बाद न्यायधीश ने दिनांक 27 सितंबर 2021 को मुन्नीलाल के पक्ष में डिक्री आदेश पारित करते हुए 1/2 हिस्सा छुटिया का मुन्नीलाल के नाम दर्ज करने का आदेश दिया न्यायधीश के फैसले के बाद मुन्नीलाल सम्पूर्ण भूमि 2.125 हेक्टेयर के वारिस हो गए, मुन्नीलाल की मृत्यु के बाद उनके वैध वारिस, राकेश, अशोक, राजकुमार, सुनीता के नाम सन 2021-22 में भूमि दर्ज हुयी।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने दो दो बार मामला किया खारिज, एडीजे के फैसले को रखा बरकार
एडीजे के फैसले के खिलाफ अनंतराम के वारिसों ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर अपील प्रस्तुत की जो दिनांक 31 जनवरी 2022 को निरस्त हो गई। इसके बाद मामले की सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गई तो वह भी कोर्ट ने दिनांक 02 सितम्बर 2022 को निरस्त कर दी। तो इसके बाद अनंतराम के वैध वारिस प्रीतम यादव वगैरह ने रिट पिटीशन डब्ल्यूपी 21710/2022 उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि उक्त मामले में पटवारी की गलत रिपोर्ट के आधार पर निचली अदालतों ने फैसला सुनाया है, मामले में सुनवाई के बाद हाई कोर्ट न्यायधीश की बेंच ने पिटिशन खारिज कर दी।इसके बाद मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जहां से डायरी नंबर 42646/2023  अपील दिनांक 08 दिसंबर 2023 को ख़ारिज हुई।
प्रीतम वगैरह ने एसडीओ नौगांव में रिकॉर्ड सुधार का प्रकरण क्रमांक 0011/3-6-अ/2023-24 दर्ज कराया। जिसमें एसडीएम नौगांव विशा माधवानी ने मामले का निराकरण करते हुए 22 अक्टूबर 2024 को आदेश करते हुए लिखा कि आरआई एवं तहसीलदार की रिपोर्ट मांगी जिसमे उन्होंने लेख किया कि मुन्नीलाल को 1/2 भूमि पहले से प्राप्त थी एवं 1/2 न्यायालय की डिक्री से प्राप्त हुई । इसके बाद एसडीएम विशा माधवानी ने हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं आरआई पटवारी और तहसीलदार के प्रतिवेदन को न मानते हुए उक्त 1/2 जमीन ममता, राजेश्वरी निवासी चंदवारी जिला हमीरपुर के नाम दर्ज कर दी। जबकि न तो ममता, राजेश्वरी ने किसी कोर्ट में नाम दर्ज करने आवेदन ही नहीं किया जमीन हमारे नाम की जाए। इसके बाद भी प्रशासन ने जमीन उनके नाम दर्ज करने का आदेश दिया। छुटिया को बिना किसी आदेश के 2.125 हेक्टेयर जमीन का मालिक बना दिया, जो कि राजस्व अभिलेख में सन 1939-40 से छुटिया तनय मुलू 1/2 के हिस्सेदार रहे कभी भी राजस्व अभिलेख में 2.125 हेक्टेयर के हिस्सेदार नहीं रहे।

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