
छतरपुर। युवा उत्सव कार्यक्रम के आज तृतीय दिवस पर अभिनय कला के अंतर्गत नाटक, हास्य नाटक व मूक अभिनय का आयोजन किया गया कार्यक्रम के संयोजक बृजेश तिवारी ने अभिनय कला विधा के अंतर्गत आने वाली समस्त उपविधाओं का परिचय दिया एंव कहा कि अभिनय एक जुड़ाव है। अभिनेता अपनी आवाज के लहजे, शारीरिक भाषा और चेहरे के भावों का उपयोग करके दर्शकों से जुड़ते हैं । अभिनय संचार है: अभिनय भावनाओं, विचारों, कलात्मक अभिव्यक्ति और कथानक के बारे में संदेश संप्रेषित करने का अभ्यास है। बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ, नि:शब्द, भगत सिंह के पिता का दर्द, साइबर अपराध, अनपढ़ नेता, दहेज प्रथा एक अभिश्राप इत्यादि शीर्षक पर एकांकी का अभिनय किया गया। इसमें सम्मिलित सभी प्रतिभागियों ने निर्धारित समयावधि में अपने संवाद व अभिनय शैली से उपस्थित सभी दर्शकों को प्रभावित किया।
आज की प्रीतियोगिता में निर्णायक मंडल में डॉ. आशीष कुमार पचौरी, डॉ. अमित कुमार जैन, डॉ. आशीष कुमार तिवारी की प्रमुख भूमिका रही। अभिनय कला कार्यक्रम संयोजक के साथ सदस्यों में नीलेश अनुरागी, दीपा सिंह खुशबू चौहान, वर्षा यादव, ऋचा पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।








