
शौचालय के पॉट में गिरने से नवजात के सिर में आई चोट, इलाज न मिलने से हुई मौत
छतरपुर। ईशानगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से रविवार को बेहद गंभीर घटना सामने आई है। दरअसल बीती रात सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ईशानगर के शौचालय में एक गर्भवती महिला ने बच्ची को जन्म दिया और शौचालय में ही बच्ची की मौत हो गई। प्रसूता महिला और उसके परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ नर्स द्वारा प्रसव कराने के एवज में पैसे मांगे जा रहे थे, जब पैसे नहीं लिए गए तो नर्स ने डिलीवरी नहीं कराई और जिला अस्पताल जाने के लिए कह दिया। कुछ समय में प्रसूता ने ईशानगर अस्पताल के शौचालय में ही बच्चे को जन्म दे दिया लेकिन समय पर इलाज न मिलने से नवजात की मौत हो गई। नाराज परिजनों ने रविवार को ईशानगर थाना पहुंचकर नर्स सहित अस्पताल के अन्य स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए कार्रवाई करने की मांग की है।ईशानगर थाना क्षेत्र के ग्राम सलैया निवासी बालकिशन आदिवासी ने बताया कि शनिवार की रात करीब 11 बजे वह गर्भवती 24 वर्षीय पत्नी प्रेमबाई आदिवासी को प्रसव के लिए ईशानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया था। बालकिशन का आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ नर्स प्रीती प्रजापति ने प्रसव कराने के एवज में उससे 2 हजार रुपए मांगे। चूंकि वह पैसे देने में असमर्थ था जिसके चलते नर्स ने प्रसव कराने से इंकार कर दिया और प्रसूता महिला को जिला अस्पताल ले जाने के लिए कहा। इसी बीच प्रसूता प्रेमबाई ने अपनी जेठानी प्यारी आदिवासी से बाथरूम जाने की बात कही। प्यारी आदिवासी ने बताया कि अस्पताल के शौचालय में अंधेरा था, जहां प्रेमबाई बाथरूम करने गई थी, तभी अचानक वह अंदर चीखने लगी। आवाज सुनकर वह अंदर गई, जहां प्रसव हो चुका था। प्रसव के दौरान नवजात बेतरतीब ढंग से शौचालय के पॉट में गिर गया था जिससे उसके सिर में चोट आ गई थी। परिजन नर्स को बुलाने गए लेकिन नर्स ने आने से इंकार कर दिया। परिजनों के मुताबिक करीब 10 मिनिट तक वे नर्स प्रीती और अस्पताल के स्वीपर को मनाते रहे लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। अंतत: बाथरूम में ही नवजात बच्ची की मौत हो गई। रविवार की सुबह बालकिशन आदिवासी, अपनी पत्नी और परिवार के लोगों के साथ ईशानगर थाना पहुंचा, जहां अस्पताल की नर्स सहित अन्य स्टाफ की शिकायत की गई।कलेक्टर ने जांच के लिए भेजी टीम, पीडि़त परिवार को मिली मददउक्त घटना की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में सीएमएचओ आरपी गुप्ता, छतरपुर एसडीम अखिल राठौर, तहसीलदार और हल्का पटवारी ईशानगर पहुंचे, जहां अधिकारियों ने पीडि़त परिवार से मुलाकात कर उनकी शिकायत सुनी। एसडीएम अखिल राठौर ने बताया कि पीडि़त परिवार को 5 हजार रुपए की त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके कथन लिए गए हैं, साथ ही प्रसूता महिला को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया है। श्री राठौर ने कहा कि संबंधित नर्स के निलंबन का प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है, साथ ही ईशानगर बीएमओ और डॉक्टर के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।रात को नहीं रहते डॉक्टर, ज्यादातर महिलाओं को किया जाता है रेफरउल्लेखनीय है कि ईशानगर का शासकीय अस्पताल लापरवाही के लिए अक्सर चर्चाओं में रहता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रात के वक्त अस्पताल में कोई चिकित्सक नहीं होता, यहां भर्ती मरीज सिर्फ नर्स के सहारे होते हैं जिस कारण से अक्सर अप्रिय घटनाएं होती हैं। इसके अलावा ज्यादातर प्रसूता महिलाओं को इलाज किए बगैर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, जिससे लोगों को परेशानी होती है। आरोप है कि ईशानगर अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक और यहां के बीएमओ रिश्ते में पिता-पुत्र हैं और वर्षों से यहां जमे हुए हैं, जिसके चलते उनकी मनमानी चरम पर है।इनका कहनासलैया निवासी पीडि़त परिवार ने शिकायती आवेदन दिया है, जिसमें अस्पताल की एक नर्स और चिकित्सकों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मामले की जांच की जा रही है, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।किशोर कुमार पटेल, थाना प्रभारी, ईशानगर









