
कॉलेज के छात्रों ने एक दिवसीय अल्पविराम के माध्यम से जाना मानवीय मूल्य
छतरपुर। स्वामी प्रणवानंद महाविद्यालय एवं मोतीलाल नेहरू लॉ कॉलेज के लगभग 100 विद्यार्थियों ने एक दिवसीय अल्पविराम कार्यक्रम के माध्यम से खुद में जांच परख कर मान्यताओं, संवेदनाओं और सहज स्वीकृति को समझने का प्रयास किया, राज्य आनंद संस्थान की ओर से लखनलाल असाटी ने कहा कि यहां सारी बातें प्रस्ताव के रूप में है जिसे मनाना नहीं है अपितु खुद के अधिकार पर उनकी जांच परख करनी है। आनंद विभाग की मास्टर ट्रेनर श्रीमती आशा असाटी, आनंदम सहयोगी रामकृपाल यादव योग गुरु, शिवनारायण पटेल पंचायत सचिव के साथ लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ रजत सत्पथि, प्रणवानंद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ शैलेंद्र राय, प्रो अर्चना शुक्ला, प्रो नरेंद्र अग्रवाल एवं रजिस्ट्रार नरेंद्र खरे प्रमुख रूप से उपस्थित थे,
शुरुआत रामकृपाल यादव द्वारा योग क्रियायो से की गई। आशा असाटी ने आनंद की ओर सत्र के माध्यम से आनंद की परिभाषा और उसके घटने और बढऩे पर विद्यार्थियों से जांच परख कराई। शिवनारायण पटेल ने बताया कि उनका आनंद कब घटता है और कब बढ़ता है। इस दौरान विद्यार्थी आकांक्षा गुप्ता, पुण्य प्रताप सिंह, बाबू सिंह चंदेल, अगम्या सिंह, रुचि दुबे, निवेदिता, आयुष्मान अग्रवाल, खातून आदि ने अपने विचार रखें। विद्यार्थियों की शेयरिंग से जो बात उभर कर आई उसमें आनंद का आधार उनके संबंध थे खासकर उनके अपने परिवार से, परंतु वह खुद और उनके परिवार का समय और फोकस संबंध के निर्वाह की जगह सुविधा जोडऩे पर उन्हें अधिक दिखाई दिया।
लखन लाल असाटी ने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि हमें अपनी आवश्यकताओं की ठीक ठीक पहचान हो जाए। आवश्यकताओं की पहचान करते समय हमें सेल्फ और बॉडी को अलग-अलग देखना होगा। क्योंकि बॉडी की आवश्यकता फिजिकल एवं केमिकल पदार्थ है जो कि बहुत लिमिटेड मात्रा में लगते हैं, परंतु सेल्फ की आवश्यकता भाव के तौर पर विश्वास सम्मान, प्रेम की है जो सतत चाहिए है। विद्यार्थियों से प्रस्ताव रूप में सारी बात की गई और कहा गया कि उन्हें प्रत्येक प्रस्ताव को खुद में जांचना और परखना है उनके अंदर एक सहज स्वीकृति बनी हुई है जिसके आधार पर वह सही-सही निर्णय ले सकते हैं और सही निर्णय ही उनके सुख का आधार बनता है। शिक्षा का काम छात्र का हॉलिस्टिक डेवलपमेंट है परंतु यदि पढ़े लिखे व्यक्ति से समाज को भय लगता है तो फिर शिक्षा पर काम करने की जरूरत है यहां मानवीय मूल्य पर काम करने की जरूरत है शिक्षक अपने विषय तक सीमित नहीं रह सकते हैं उन्हें उसके आगे बढ़कर काम करना होगा।








