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श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह हुआ

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छतरपुर। जिला मुख्यालय के पास स्थित ढड़ारी गांव में 21 कुंडीय श्री रुद्र महायज्ञ एवं संगीतमय श्रीमद भागवत महापुराण कथा महोत्सव का आयोजन चल रहा है, जो 2 फरवरी तक किया जाना है। गांव ढड़ारी में पिछले 6 दिनों से चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का हुआ। भागवत कथा के व्यास पीठ पर कथावाचिका देवी सुरभि द्विवेदी ने पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाये जाने वाले पंच गीत, भागवत के पंच प्राण हैं, जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है। वह भव पार हो जाता है। उसे वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती हैं। महाराज ने कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, उद्धव-गोपी संवाद, द्वारका की स्थापना, रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया उन्होंने कहा कि भगवान की महारास लीला इतनी दिव्य है कि स्वयं भोलेनाथ उनके बाल रूप के दर्शन करने के लिए गोकुल पहुंच गए। मथुरा गमन प्रसंग में अक्रूर जी भगवान को लेने आए। जब भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने लगे समस्त ब्रज की गोपियां भगवान कृष्ण के रथ के आगे खड़ी हो गईं। कहने लगी हे कन्हैया जब आपको हमें छोड़कर ही जाना था तो हम से प्रेम क्यों किया। गोपी उद्धव संवाद, श्री कृष्ण एवं रुकमणी विवाह उत्सव पर मनोहर झांकी प्रस्तुत की गई क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना को लेकर प्रतिदिन कथा व्यास पूज्य दीदी प्रिया किशोरी देवी,स्वामी सत्यानंद महाराज और पगलानंद महाराज के साथ अन्य पंडितों के द्वारा परिसर में बनाई गई 21 हवन वेदियों में मंत्र उच्चारण के साथ हवन पूजन किया जा रहा है। ग्राम से ऋषिराम गंगेले,गिरजा प्रसाद गंगेले,पुनाराम गंगेले, सियाराम रावत, भुजवाल सिंह, मंगल सिंह, कृष्णकुमार गंगेले, दिलीप सिंह ,विनोद तिवारी ,इंद्रपाल सिंह चंदेल,दुर्गा तिवारी, ज्ञानेश्वर गंगेले, देवेंद्र सिंह, श्रीराम गंगेले,नरेंद्र सिंह चंदेल,उमराव रैकवार एव समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।

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