
छतरपुर। प्रदेश सरकार जहां महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से बच्चों के शारीरिक विकास, पोषण एवं आरंभिक शिक्षा के लिए बड़े पैमाने पर बजट खर्च कर रही है। इसके लिए कई योजनाएं भी चलाई जा रहीं हैं जिससे जिले के आंगनबाड़ी केंद्र सुचारू रूप से संचालित हो सकें। लेकिन जिले में लगभग 50 फीसदी ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं जो भवन विहीन हैं जो खुले में या वृक्षों के नीचे केंद्र संचालित होने को मजबूर है। जिला मुख्यालय से सटी ग्राम पंचायत दालौन में भी आंगनबाड़ी भवन न होने से जहां एक ओर नौनिहाल जर्जर भवनों में बैठने को मजबूर हैं तो वहीं आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालित होने वाली विभिन्न योजनायें सही तरीके से क्रियान्वित नहीं हो पा रही है। आंगनबाड़ी के लिए जर्जर भवन की व्यवस्था होने से अभिभावन अपने बच्चों को बाड़ी भेजने में कतरा रहे हैं। इनकी स्थिति देखकर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान लग रहे हैं।ग्राम पंचायत दालौन निवासी पूरन लाल अहिरवार सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि गंाव में दो आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें से एक आंगनबाड़ी केंद्र दालौन गांव में तथा दूसरा गुजरातनपुरवा कछियन पुरवा में है । जब से यह केंद्र बनाए गए हैं तब से यहां आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण नहीं कराया गया है। कछियनपुरवा में संचालित आंगनवाड़ी केंद्र स्कूल के 30 साल पुराने कमरे में संचालित है जो अत्यंत जर्जर और बदहाल हो चुका हैं। इसके बाद भी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहा है, जिसे नौनिहाल बच्चों के लिए सिर पर खतरा मंडरा रहा है। यहां की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता नागवंशी ने बताया कि बरसात में छत से पानी टपकने लगता है से बच्चों को बैठने के लिए जगह ने मिलती है। उन्होंने बताया कि यहां पक्का पहुंच मार्ग न होने से रास्ते में करीब डेढ़ से दो फुट पानी भर जाता है जिससे बच्चे बरसात में यहां नहीं पहुंच पाते। आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की दर्ज संख्या 50 से अधिक है। ग्रामीणों की मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर भवन को डिसमेंटल कर नए आंगनबाड़ी भवन निर्माण किया जाए। गांव के दूसरे आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता सीता पाठक है यहां भवन की समस्या आढ़े आ रही है। दोनों ही आंगनबाड़ी केंद्रों से संचालित होने शासन की विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं हो पा रहा है। सरपंच प्रतिनिधि प्रेमचंद्र अहिरवार का आरोप है कि पंचायत में बीआरजीफ मद से 2011 में एक आंगनबाडी भवन का निर्माण तो किया गया था लेकिन वह भी अपूर्ण है जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। उन्होंने बताया कि वे प्रशासन को कई बार लिखित आवेदन देकर माग कर चुके हैं लेकिन अभी समस्या का हल नहीं हुआ।वहीं सरपंच आशा अहिरवार का कहना है प्रशासन आंख मूंदकर बैठा है। आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली को प्रशासन और विधायक सभी नजरअंदाज कर रहे हैं। जर्जर आंगनबाड़ी केंद्र में हादसे का डर बना रहता है। भवन इस कदर जर्जर है, कि कभी भी कोई भी दुर्घटना हो सकती है। भविष्य में यदि कोई अनहोनी हो जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?इनका कहना हैमैंने आज ही दालौन के आंगनबाड़ी केंद्रों का भ्रमण किया। हाँ गांव में आंगनबाड़ी भवनों की समस्या है, इसके लिए एक आंगनबाड़ी भवन का निर्माण बीआरजीएफ मद से सन् 2011 में कराया गया था जो अपूर्ण है उसे पूरा कराया जाएगा । वहीं दूसरे भवन को स्वीकृत करवाने के लिए आला अधिकारियों को लिखा है।राजीव सिंह, जिला परियोजना अधिकारीमहिला एवं बाल विकास, छतरपुर









