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बुंदेलखंड के लिए बड़ी सौगात: खजुराहो-छतरपुर-भोपाल रेल लाइन सर्वे को हरी झंडी, 320 किमी लंबा होगा नया रेल मार्ग

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छतरपुर। बुंदेलखंड के विकास की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए छतरपुर और पर्यटन नगरी खजुराहो को सीधे राजधानी भोपाल से जोडऩे वाली नई रेल लाइन के सर्वे के आदेश जारी कर दिए हैं। इस महत्वपूर्ण परियोजना के तहत सागर-छतरपुर-खजुराहो-भोपाल के बीच लगभग 320 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के सर्वेक्षण हेतु राशि स्वीकृत की गई है। इस नई रेल लाइन के शुरू होने से न केवल छतरपुर जिला बल्कि सागर और दमोह संसदीय क्षेत्र के विकास को भी नए पंख लगेंगे।प्रमुख पड़ाव और प्रस्तावित मार्ग की रूपरेखारेलवे द्वारा स्वीकृत किए गए इस सर्वे के तहत रेल लाइन भोपाल से शुरू होकर बंडा, शाहगढ़, हीरापुर और बड़ामलहरा जैसे महत्वपूर्ण कस्बों को जोड़ते हुए छतरपुर और खजुराहो तक पहुँचेगी। वर्तमान में खजुराहो और छतरपुर से भोपाल जाने के लिए यात्रियों को सड़क मार्ग या अन्य लंबी रेल दूरियों पर निर्भर रहना पड़ता है। इस 320 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मार्ग के तैयार होने के बाद, बुंदेलखंड के इन पिछड़े और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी का एक मजबूत जाल बिछ जाएगा, जिससे आर्थिक और सामाजिक बदलाव की नई लहर आएगी।विकास और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तारइस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ पर्यटन और क्षेत्रीय व्यापार को होगा। खजुराहो जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र को सीधे राजधानी भोपाल और औद्योगिक केंद्र सागर से जोडऩे से अंतरराष्ट्रीय और घरेलू पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके अलावा, बड़ामलहरा और शाहगढ़ जैसे क्षेत्रों के व्यापारियों और आम जनता को भोपाल तक पहुँचने के लिए एक सुगम और सस्ता विकल्प मिल सकेगा। यह पहल दमोह और सागर संसदीय क्षेत्रों के उन हिस्सों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ेगी जो अब तक इस सुविधा से वंचित थे।अभी सर्वे की स्वीकृति, निर्माण पर निर्णय बाद मेंयह स्पष्ट करना आवश्यक है कि रेलवे बोर्ड ने फिलहाल केवल इस मार्ग की व्यवहार्यता और अनुमानित लागत के आकलन के लिए सर्वेक्षण (सर्वे) की स्वीकृति दी है। इस प्रक्रिया के दौरान रेलवे के अधिकारी भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों, प्रस्तावित मार्ग की तकनीकी संभावनाओं और कुल खर्च का विस्तृत ब्योरा तैयार करेंगे। सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद ही बजट आवंटन और वास्तविक निर्माण कार्य शुरू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, सर्वे का आदेश मिलना ही बुंदेलखंडवासियों के लिए एक बड़े सपने के सच होने की पहली सीढ़ी माना जा रहा है।

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