छतरपुर। छतरपुर जिला अस्पताल परिसर में का वह पार्क आज अपनी बदहाली की तस्वीर खुद बयां कर रहा है, जिसे कभी तत्कालीन कलेक्टर संदीप जीआर के सपनों की परियोजना माना गया था। जिला अस्पताल को सुंदर और स्वच्छ बनाने की मंशा से बनाए गए इस पार्क का उद्देश्य मरीजों और उनके परिजनों को शुद्ध वातावरण और स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना था, लेकिन आज वही पार्क कचरे के ढेर में तब्दील होता नजर आ रहा है।गौरतलब है कि यह वही स्थान है जहां पहले रेड क्रॉस की दुकान, जिला अस्पताल का ब्लड बैंक सहित अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित हुआ करती थीं। अस्पताल के कायाकल्प के दौरान इसे एक सुंदर आकृति में विकसित कर पार्क का रूप दिया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज और उनके परेशान परिजन अस्पताल के शोर-शराबे से दूर यहाँ कुछ पल मानसिक शांति के साथ बिता सकें। दुर्भाग्यवश, वर्तमान में यह पार्क शांति के बजाय गंदगी, प्लास्टिक की बोतलों और कचरे से पटा पड़ा है। पार्क की इस दुर्दशा के पीछे दो मुख्य कारण सामने आ रहे हैं। पहला, जिला अस्पताल प्रबंधन की ओर से पूरे पार्क में केवल एक डस्टबिन रखी गई है, जो इतने बड़े परिसर के लिए नाकाफी है। दूसरा, आमजन में स्वच्छता के प्रति जागरूकता की भारी कमी है। लोग डस्टबिन की तलाश करने या उसका उपयोग करने के बजाय खुले में कचरा फेंक रहे हैं, जिससे पार्क की सुंदरता और स्वच्छता पूरी तरह से प्रभावित हो रही है। जानकारी के अनुसार, हाल ही में पार्क में सघन साफ-सफाई कराई गई थी, लेकिन कुछ ही समय में लोगों की लापरवाही के कारण फिर से वहां गंदगी का अंबार लग गया। हैरानी की बात यह है कि जिला अस्पताल प्रबंधन इस स्थिति पर कोई ठोस निगरानी या स्थायी व्यवस्था करता नजर नहीं आ रहा है। स्वच्छ भारत अभियान के बड़े-बड़े दावों के बीच जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में यह स्थिति न केवल प्रशासन की उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि आमजन की नागरिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।










